निःशस्त्र अहिंसा की शक्ति किसी भी परिस्थिति में सशस्त्र शक्ति से सर्वश्रेष्ठ होगी।

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छठवाँ दीक्षांत समारोह- 2026 की तिथि संबंधी सूचना।



वर्धा समाज कार्य संस्थान (सत्र: 2020-21) के शोधार्थी सुश्री नीता उघडे एवं श्री प्रेसकुमार सूर्यवंशी की पी-एच.डी. पूर्व प्रस्तुति के संबंध में।



प्रदर्शनकारी कला (सत्र: 2020-21) विभाग के शोधार्थी शिवकांत वर्मा की पी-एच.डी. पूर्व प्रस्तुति के संबंध में।



गांधी एवं शांति अध्‍ययन विभाग (सत्र: 2020-21) के पी-एच.डी. शोधार्थी श्री उत्तम आनंदराव केते की मौखिकी के संबंध में।



शोधार्थी श्रीराम ज्ञानेश्‍वर बालेकर को पी-एच.डी. उपाधि प्रदान किए जाने के संबंध में।



JLPT (N5, N4 एवं N3) परीक्षाओं की तैयारी हेतु विशेष कक्षाओं के संचालन के संबंध में।



शोधार्थी सुश्री रेणु शर्मा को पी-एच.डी. उपाधि प्रदान किए जाने के संबंध में।



दीक्षांत समारोह-2026 कार्यक्रम के लिए बिछायत, प्रकाश, स्टेज ए.सी. एवं ध्वनिक्षेपण आदि व्यवस्था हेतू निविदा सूचना एवं संलग्न निविदा प्रपत्र



समय-सारणी (सत्र : 2023-27) संशोधित : बी.ए. (मराठी भाषा) षष्ठम सेमेस्टर, मराठी विभाग

समय-सारणी (सत्र : 2025-27) संशोधित : एम.ए. मराठी द्वितीय सेमेस्टर, मराठी विभाग



समय-सारणी (सत्र : 2025-26) संशोधित : भाषा प्रौद्योगिकी एवं भाषा अभियांत्रिकी विभाग, भाषा विद्यापीठ



पी-एच.डी. शोधार्थी शिशिर कुमार के विभागीय शोध मॉनीटरिंग समिति (DRMC) की बैठक के संबंध में।



‘भारतीय साहित्य को कुबेरनाथ राय का अवदान’ विषय पर हुआ परिसंवाद

राष्ट्रीय सेवा योजना के विशेष शिविर का हुआ समापन

अमरावती के समाज कार्य महाविद्यालय के विद्यार्थियों का विश्वविद्यालय में शैक्षणिक भ्रमण



कंप्‍यूटर अनुप्रयोग में चार वर्षीय स्‍नातक कार्यक्रम (सत्र : 2023-27) चतुर्थ सेमेस्‍टर (संशोधित)



बी.ए. (सामान्‍य) (सत्र : 2021-24) द्वितीय सेमेस्‍टर (पूरक)

बी.ए. (सामान्‍य) (सत्र : 2021-24) चतुर्थ सेमेस्‍टर (पूरक)

बी.ए. (सामान्‍य) (सत्र : 2021-24) षष्‍ठ एवं सकल सेमेस्‍टर (पूरक)

जनसंचार में चार वर्षीय स्‍नातक कार्यक्रम (सत्र : 2022-26) द्वितीय सेमेस्‍टर (संशोधित)

जनसंचार में चार वर्षीय स्‍नातक कार्यक्रम (सत्र : 2022-26) षष्‍ठ सेमेस्‍टर (संशोधित)

मास्‍टर ऑफ कंप्‍यूटर एप्‍लीकेशन (सत्र : 2022-24) तृतीय सेमेस्‍टर (संशोधित)

मास्‍टर ऑफ कंप्‍यूटर एप्‍लीकेशन (सत्र : 2023-25) चतुर्थ सेमेस्‍टर एवं सकल (संशोधित)



प्रथम स्वाधीनता संग्राम की नायिका वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई पर हुआ सांस्कृतिक एवं बौद्धिक कार्यक्रम

ICSSR द्वारा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की शोध परियोजना स्वीकृत, चेरो जनजाति की पारंपरिक पारिस्थितिकी ज्ञान प्रणाली पर होगा शोध



ऑस्ट्रेलिया की संस्था ने कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा को किया सम्मानित



विश्वविद्यालय में अप्रैल, 2026 में प्रस्तावित छठवें दीक्षांत समारोह के सफल आयोजन हेतु समितियों का गठन



सत्र: 2021-24 के बी.ए. (ऑनर्स/सामान्‍य) कार्यक्रम के 260 अंकपत्रों को रद्द करने के संबंध में अधिसूचना।



समाजशास्त्र विभाग के एम.ए. चतुर्थ छमाही (2024-26) के विद्यार्थियों के लघु शोध प्रबंध हेतु मार्गदर्शक नामित किए जाने के संबंध में।



विश्‍वविद्यालय में वर्ष 2026 हेतु राजपत्रित एवं वैकल्पिक अवकाश।


हिंदी शिक्षण अधिगम केंद्र

निदेशक का संदेश

विश्वविद्यालय में हिंदी शिक्षण अधिगम केंद्र की स्थापना हिंदी को अधिकाधिक उपयोगी एवं प्रासंगिक बनाने और उसके संवर्धन व विकास हेतु विविध आयामी कार्यक्रमों तथा उपक्रमों को संचालित करने के लिए की गई है। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय भाषा के साथ ही अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी की भूमिका को प्रकाशित करने एवं प्रवासी भारतीयों के बीच अभिव्यक्ति के माध्यम के रूप में हिंदी को विकसित करना भी है। संसार के प्रत्येक भू-भाग में रहने वाले भारतवंशी अपनी साझी विरासत की भाषा के रूप में हिंदी के महत्व को स्वीकार करते हुए उसे उपयुक्त एवं प्रासंगिक बनाए रखने के लिए कृतसंकल्प हो सकें, केंद्र इस दिशा में भी सार्थक प्रयास हेतु संकल्पबद्ध है।

भारत के लिए हिंदी मात्र एक भाषा न होकर उसकी अस्मिता की पहचान है, जड़ों से जुड़ने की सार्थक कोशिश है। हिंदी भाषा के प्रति देश में अनन्य आकर्षण है। विविध-आयामी संस्थाओं, विद्यालयों, परिषदों, आयोगों, संघों, धार्मिक प्रतिष्ठानों, न्यायालयों, अस्पतालों आदि में हिंदी के नियमित प्रयोग को प्रोत्साहन देना हमारा अभीष्ट है। संपूर्ण देश में हिंदी सिनेमा, गीतों-गजलों व भजनों आदि का हिंदी में प्रयोग-उपयोग इसका प्रमाण है।

हिंदी के प्रचार-प्रसार, विकास व सम्मान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले हिंदी सेवियों की एक लंबी सूची है, जो संपूर्ण विश्व में हिंदी को समृद्ध करने में लगे हैं। हिंदी को विश्व भाषा बनाने में उन प्रवासी भारतीयों का प्रमुख योगदान है, जो व्यापार अथवा मजदूरी के लिए दूसरे देशों में गये लेकिन जिन्होंने वहाँ अपनी संस्कृति और भाषा को कभी विस्मृत नहीं होने दिया। इसके अतिरिक्त बहुत सारे विदेशी विद्वानों ने भी हिंदी के संवर्धन एवं विकास में अपना बहुमूल्य योग दिया है। अत: इन सभी तथ्यों के आलोक में कार्यक्रमों की योजना बनाना और तदनुसार उसे क्रियान्वित करना केंद्र का लक्ष्य है, जिसे प्राप्त करने हेतु यह निरंतर अग्रसर है।

केंद्र का उद्देश्य

हिंदी शिक्षण अधिगम केंद्र (TLCHS) के उद्देश्‍य निम्‍नलिखित कार्यक्रमों/ योजनाओं का क्रियान्‍वयन करना है-

  • हिंदी शिक्षण के पाठ्यक्रम/ पाठ्यचर्या संरचना/ रूपरेखा के विकास संबंधी कार्यक्रम।
  • हिंदी शिक्षण हेतु पाठ्यक्रम संरचना में प्रतिमानात्‍मक बदलाव के आलोक में मूल्‍यांकन पद्धति के विकास संबंधी कार्यक्रम।
  • हिंदी शिक्षण में पाठ्यक्रम ढाँचे/ संरचना के विकास के अनुरूप वैकल्पिक शिक्षा वैज्ञानिक अंत:क्षेपों (Pedagogic interventions) को स्‍पष्‍ट करने संबंधी कार्यक्रम।
  • हिंदी शिक्षण हेतु शिक्षण-अधिगम सामग्री के विकास संबंधी कार्यक्रम।
  • हिंदी शिक्षण के लिए पाठ्य पुस्‍तक/ पुस्तिका के विकास से संबंधित कार्यक्रम।
  • क्षेत्रीय/ प्रादेशिक भाषाओं में/ से मूलपाठ के अनुवाद हेतु कार्यक्रम।
  • हिंदी तथा भाषा वैज्ञानिक शिक्षण से संबंधित शोध के प्रोत्‍साहन हेतु संसाधनों, संदर्भ सेवा, इलेक्‍ट्रानिक डाटाबेस के भण्‍डारण तथा ई-सामग्री के विकास से संबंधित कार्यक्रम।
  • हिंदी शिक्षण के प्रोत्‍साहन हेतु अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर विश्‍वविद्यालयों, महाविद्यालयों, उच्‍च शिक्षा केंद्रों का संजाल/ समूह विकसित करने संबंधी बहुआयामी कार्यक्रम।
  • हिंदी में पाठ्य पुस्‍तकों के विकास एवं निर्माण संबंधी कार्यक्रम।
  • सृजनात्‍मक लेखन के लिए पाठ्यक्रम निर्माण व विकास संबंधी कार्यक्रम।
  • हिंदी एवं कला, हिंदी एवं हिंदी साहित्‍य, हिंदी एवं भारतीय संस्‍कृति के साथ ही अन्‍य विषयों पर शोध संबंधी कार्यक्रम।
  • हिंदी में संदर्भ कोश/ पारिभाषिक कोश/ प्रासंगिक कोश के विकास हेतु कार्यक्रम।