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:: साक्षात

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Gandhi Hill

शांति, अहिंसा, सत्याग्रह, खादी, चरखा, स्वराज और जनता के हित के लिए आत्मबल का संदेश देने वाले महात्मा गांधी हिंदी के भी उतने ही बड़े हिमायती थे। वे मानते थे कि आजादी की लड़ाई में हिंदी का उपयोग एक निर्णायक हथियार के रूप में किया जा सकता है। उन्होंने दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा और राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा की स्थापना की थी। इन दोनों संस्थाओं ने अहिंदी भाषी क्षेत्रों में हिंदी के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्हीं में से एक राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, वर्धा के प्रयासों से 1975 में नागपुर में हुए पहले विश्व सम्मेलन में स्वीकृत एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव के अनुरूप 1997 में भारत की संसद में पारित एक विशेष अधिनियम के तहत वर्धा में अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ ही भारतेंदु की एक अधूरी आकांक्षा भी पूरी हुई। भारतेंदु की संचित अभिलाषा थी - 'अपने उद्योग से मैं एक शुध्द हिंदी यूनिवर्सिटी स्थापित करता।' महात्मा गांधी द्वारा हिंदी के संवर्धन के लिए किए गए कार्यों को देखते हुए उन्हीं के नाम पर भारत के बीचों-बीच स्थित वर्धा में पांच टीलों पर यह अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय बना।

   

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