स्वागतम विद्यापीठ/केंद्र दूरस्थ शिक्षा सुविधाएँ गतिविधियाँ सूचना पट्ट प्रकाशन संग्रहालय प्रवेश हिंदी समय ब्लॉग समय

 
विश्वविद्यालय-वीडियो
विदेशी शिक्षण प्रकोष्ठ
हिंदी विशेषज्ञ सूचना बैंक
आईए हिंदी सीखें
सूचना का अधिकार
 

विश्वविद्यालय की पत्रिकाएँ


 
Research Exclusive
E-Resources
Web-OPAC (पुस्तकालय)
 
 
mediasamay.comConvocation

gallary

 

दर्शक संख्या : 2139539  



वर्धा हिंदी शब्दकोश (सॉफ्टवेयर संस्करण) - डाउनलोड करें :: समाज-विज्ञान विश्वकोश :: सक्षम हिंदी वर्तनी परीक्षक (Hindi Spell Checker) - डाउनलोड करें :: एकीकृत अनुवादक सूची के लिए पंजीकरण प्रपत्र :: Courses in Hindi for International students

महात्मा गांधी के सपनों के भारत में एक सपना राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी को प्रतिष्ठित करने का भी था। उन्होंने कहा था कि राष्ट्रभाषा के बिना कोई भी राष्ट्र गूँगा हो जाता है। नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिंदी सम्मेलन (10-14 जनवरी,1975) में यह प्रस्ताव पारित किया गया था कि संयुक्त राष्ट्रसंघ में हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्थान दिया जाए तथा एक अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना की जाय जिसका मुख्यालय वर्धा में हो। अगस्त,1976 में मॉरीशस में आयोजित द्वितीय विश्व हिंदी सम्मेलन में यह तय किया गया कि मॉरीशस में एक विश्व हिंदी केंद्र की स्थापना की जाए जो सारे विश्व में हिंदी की गतिविधियों का समन्वय कर सके।

चतुर्थ विश्व हिंदी सम्मेलन (दिसम्बर-1993) के बाद विश्व हिंदी सचिवालय की स्थापना मॉरीशस में हुई और भारत में एक अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना को मूर्त रूप देने की आवश्यकता समझी गयी। यह संभव हुआ वर्ष 1997 में- जब भारत की संसद द्वारा एक अधिनियम पारित करके महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की स्थापना राष्ट्रपिता की कर्मभूमि वर्धा में की गयी। इस विश्वविद्यालय की स्थापना से भारतेंदु बाबू हरिश्चंद्र की एक लालसा भी पूरी हुई जो उनके मन-मस्तिष्क में छायी रही थी। वह लालसा थी ‘अपने उद्योग से एक शुद्ध हिंदी की यूनिवर्सिटी स्थापित करना’।

» आगे पढ़े

Mahatma Gandhi Antarrashtriya Hindi Vishwavidyalaya or Mahatma Gandhi International Hindi University was established to fulfil a dream of Mahatma Gandhi, the father of the nation. Mahatma Gandhi was of the firm opinion that Hindi should not only be the national language of the country but it should also gain the status of a world language. The dream of the Mahatma was reflected in the resolutions passed by the First World Hindi Conference organized in Nagpur in the year 1975. The first resolution demanded Hindi to be made one of the official languages of the United Nations Organisation and the second resolved to establish an International Hindi University at Wardha, the land where Gandhi ji experimented all programmes dear to his heart.
The University was created by an Act passed by the Indian Parliament in 1997 .Section-3 of the Act mandates special and unique responsibility to the University to enrich Hindi language and literature by teaching and research and make it capable of becoming a World language in the real sense of the term. Since 1997 the University is functioning as a residential University solely dedicated to the cause of Hindi. Spread in an area of more than two hundred acres, the fast coming University buildings are pleasant blend of aesthetics and functional utility.
» Read more...