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bullet कुलाध्यक्ष

श्रीमती प्रतिभा देवीसिंह पाटिल का जन्म 19 दिसम्बर 1934 को महाराष्ट्र राज्य के जलगाँव जिले के नादगाँव में हुआ। उन्होंने 25 जुलाई 2007 को भारत के 12वें राष्ट्रपति के रूप में पदभार ग्रहण किया। आप भारत की पहली महिला राष्ट्रपति हैं। राष्ट्रपति पद ग्रहण करने से पूर्व श्रीमती पाटिल राजस्थान राज्य के राज्यपाल पद पर आसीन थीं (8 नवम्बर, 2004 से 21 जून, 2007 तक)। शिक्षा : श्रीमती पाटिल ने अपनी प्रारम्भिक शिक्षा आर. आर. विद्यालय, जलगाँव से तथा आगे चलकर मूलजी जेठा महाविद्यालय, जलगाँव से राजनीति शास्त्र तथा अर्थशास्त्र विषयों में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। उन्होंने राजकीय विधि महाविद्यालय,मुम्बई से विधि स्नातक (एलएलबी) उपाधि भी प्राप्त की। महाविद्यालय में आपने खेलों - विशेषत: टेबिल टेनिस- में सक्रिय तौर पर भाग लेकर अंतरमहाविद्यालयी पुरस्कार प्राप्त किए। विधायक रहते हुए भी आपने विधि-स्नातक उपाधि का अध्ययन पूरा किया।

bullet कुलाधिपति

प्रो. नामवर सिंह का जन्म 28 जुलाई, 1927 को हुआ। प्रो.सिंह साहित्यालोचना के प्रमुख स्तंभो में से है जिनकी पुस्तकें और व्याख्यान पाठक और श्रोताओं को अभिभूत कर देती हैं। उनकी कुछ प्रमुख किताबों में कहानी नई कहानी, कविता के नए प्रतिमान, छायावाद, दूसरी परम्परा की खोज और बात-बात में बात आदि है। साहित्य अकादमी सम्मान से पुरस्कृत प्रो. सिंह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के प्रोफेसर एमेरिटस हैं। हिंदी आलोचना की प्रतिष्ठित पत्रिका आलोचना का लगभग दो दशकों तक संपादन भी किया। प्रो. नामवर सिंह प्रारंभ से ही महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से जुडे रहे हैं। वह विश्वविद्यालय के निर्माण के प्रमुख समूह के सदस्य रहें हैं जिसने इस विश्वविद्यालय के दृष्टिकोण को निर्मित किया। प्रो. सिंह ने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति के रूप में जनवरी 2006 में पदभार ग्रहण किया।

bullet कुलपति

श्री विभूति नारायण राय (जन्म 28 नवम्बर 1951) ने 1971 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अंग्रेजी साहित्य से स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त की। 1975 में भारतीय पुलिस सेवा में पदस्थ हुए और उ.प्र. कैडर में शामिल किए गए।

आपने बहुत सारे संवेदनशील इलाकों में पुलिस अधीक्षक के रूप में कार्य किया। 1992 से 2001 तक भारत सरकार में प्रतिनियुक्ति पर रहे। इस दौरान 1993-94 में कश्मीर घाटी में एंटी-इंसर्जेन्सी ऑपरेशन में नियुक्त किए गए। उत्तर प्रदेश में पुलिस महानिदेशक के पद पर कार्य करते हुए दिनांक 29 अक्टूबर 2008 को विश्वविद्यालय के कुलपति का पदभार ग्रहण किया।

एक प्रतिष्ठित पुलिस अधिकारी होने के साथ ही विभूति नारायण राय एक सुप्रसिद्ध हिंदी रचनाकार भी हैं। उन्होंने घर, शहर में कर्फ्यू, किस्सा लोकतंत्र का, तबादला और प्रेम की भूतकथा पाँच उपन्यास लिखे हैं और सभी का हिंदी के पाठकों एवं आलोचकों ने गर्मजोशी से स्वागत किया है। शहर में कर्फ्यू उपन्यास अंग्रेजी,उर्दू, पंजाबी, बांग्ला, मराठी और कन्नड़ में अनूदित हुआ है। अन्य उपन्यास भी कई भाषाओं में अनूदित हुए हैं। आपके द्वारा लिखित एक छात्रनेता का रोजनामचा - व्यंग्य संग्रह की काफी सराहना हुई है। 


bullet प्रति-कुलपति

प्रो. ए. अरविंदाक्षन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कोच्ची के हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं अध्यक्ष रहे हैं। वे इसी विश्वविद्यालय में मानवीय संकाय के अध्यक्ष, कुलसचिव, सृजनात्मक लेखन केंद्र के निदेशक, विज्ञान संप्रेषण केंद्र के निदेशक, कार्यपरिषद, विद्यापरिषद, सेनेट के सदस्य रहे। जून 2009 में सेवा निवृत्त हुए।

प्रो. ए. अरविंदाक्षन पूर्व में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद एवं विद्यापरिषद के भी सदस्य रहे हैं।

उनकी करीब 50 पुस्तकें एवं कई शोधपत्र प्रकाशित हैं। पुस्तकें तीन भाषाओं में है- हिंदी, मलयालम एवं अंग्रेजी। 'कविता का थल और काल', समकालीन हिंदी कविता, कविता सबसे सुन्द‍र सपना है, प्रेमचंद: भारतीय कथाकार, समकालीन कविता की भारतीयता- उनकी कुछ मुख्य पुस्तकें हैं। अब तक छह कविता-संकलन प्रकाशित हैं। अनूदित रचनाएं भी बहुत हैं।

कई विश्‍वविद्यालयों की पाठ्यक्रम समितियों में, स्‍कूल बोर्डों में, विश्‍वविद्यालय अनुदान आयोग एवं भारत सरकार की विशेषज्ञ समितियों के वे सदस्‍य हैं।

प्रो. अरविंदाक्षन कई पुरस्कारों से विभूषित हैं तथा संप्रति केंद्रीय हिंदी समिति (भारत सरकार की सर्वोच्च समिति) के सदस्य हैं।

bullet अधिष्ठाता -भाषा विद्यापीठ

प्रो. उमाशंकर उपाध्याय, अधिष्ठाता - भाषा विद्यापीठ

डॉ. उमाशंकर उपाध्याय (जन्म 1947) ने उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से एम.ए. हिंदी (1967) तथा सर्वोच्च श्रेणी सहित एम.ए. भाषा विज्ञान (1969) की उपाधि प्राप्त की। अपने स्नातकोत्तर अध्ययन क्रम में 'वर्ब मॉर्फोलोजी ऑफ लुगांडा (1969) पर शोध अध्ययन के उपरांत उन्होंने 'ए डिस्क्रिप्टिव स्टडी ऑफ दि बंजारा लैंग्वेज विषय पर पीएच.डी. भाषाविज्ञान (1976) का शोधकार्य संपन्न किया।

अपने 34 वर्ष के सुदीर्घ अध्यापन काल में उन्होंने भाषाविज्ञान विभाग, उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद, केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा, स्नातकोत्तर हिंदी विभाग, सरदार पटेल विश्वविद्यालय, वल्लभ विद्यानगर तथा हिंदी विभाग, पुणे विश्वविद्यालय, पुणे, में कार्य किया। वे केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा द्वारा प्रकाशित अनुप्रयुक्त भाषा विज्ञान की अर्द्धवार्षिक शोधपत्रिका 'गवेषणा' के सहायक संपादक (1977-82) रहे तथा 1984 में उन्होंने तत्कालीन शिक्षा विभाग, भारत सरकार के लिए 'भारत के उत्तर-पूर्वी राज्यों में हिंदी का शिक्षण एवं व्यवहार’ विषय और मणिपुर राज्यों का सर्वेक्षण किया। उन्होंने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की दो शोध परियोजनाएँ-'स्वातंत्र्योत्तर हिंदी उपन्यासों में कोड-मिश्रण और कोड-परिवर्तन' (1990) तथा 'हिंदी और गुजराती का तुलनात्मक अध्ययन' (1991) पूर्ण की।

पुणे विश्वविद्यालय, पुणे के प्रोफेसर एवं हिंदी विभागाध्यक्ष पद पर (1991-2005) कार्य करते हुए उन्होंने हिंदी भाषा तथा अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान के विभिन्न पक्षों के शिक्षण तथा संबध्द शोधकार्य को प्रोत्साहित किया। वे सितंबर 1999 में लंदन, यू.के. में आयोजित छठे विश्व हिंदी सम्मेलन में महाराष्ट्र राज्य सरकार की ओर से विषय विशेषज्ञ के रूप में प्रतिनियुक्त हुए। इंटरनेशनल बकलॉरिएट आर्गनाइजेशन (आईबीओ) स्विट्जरलैंड द्वारा 'ऐब इनीशियो-हिंदी 'पाठ्यक्रम' आरंभ किए जाने पर उन्होंने पाठ्यविवरण निर्माण तथा परीक्षण कार्य (1999-2004) में योगदान दिया तथा 2003 में कार्डिफ़, वेल्स, यू.के. में आयोजित भाषा परीक्षकों की बैठक में भाग लिया। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद, नई दिल्ली, द्वारा फरवरी 2005 से 'ओवोश लोरान्द विश्वविद्यालय, बुदापैश्त, हंगरी के भारोपीय अध्ययन विभाग में प्रतिनियुक्ति पर अतिथि आचार्य के पद पर कार्य करते हुए अक्तूबर 2007 में उन्होंने 'मध्य तथा पूर्वी यूरोपीय देशो में अन्तरराष्ट्रीय भाषा के रूप में हिंदी का विकास' विषय पर त्रिदिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया तथा तद्विषयक सत्र की अध्यक्षता की।

म.प्र. के कोरकू आदिवासी छात्रों के हिंदी शिक्षण के लिए उन्होंने पाठ्यपुस्तकों, अभ्यास पुस्तिकाओं तथा शिक्षक निर्देशिकाओं का निर्माण किया भाषाविज्ञान और हिंदी भाषा के विभिन्न पक्षों पर उनके अनेक लेख पत्रिकाओं और पुस्तकों में प्रकाशित हैं। 'शैलीविज्ञान और प्रतीकविज्ञान', 'शब्दकल्प', और 'माध्यमिका' उनकी संपादित कृतियाँ हैं। वे हिंदी साहित्य सम्मेलन प्रयाग की मानद उपाधि 'विद्यावाचस्पति (1998) से सम्मानित हैं।

bullet अधिष्ठाता -साहित्य विद्यापीठ

प्रो. सूरज पालीवाल (जन्म 1951) एक सुप्रसिध्द अकादमिक व्यक्तित्व हैं। वर्तमान में साहित्य विद्यापीठ के अधिष्ठाता हैं। उन्होंने अपनी उच्च शिक्षा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से प्राप्त की है। उनके पास 28 वर्षों का अकादमिक एवं प्रशासनिक अनुभव है। वर्ष 2000 से 2003 तक जोधपुर विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अध्यक्ष रहे। प्रो. पालीवाल 'जोधपुर विश्वविद्यालय समाचार बुलेटिन' के संस्थापक संपादक रहे। वर्ष 2005 से वे भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला से जुडे हुए हैं।
उनकी लगभग 11 पुस्तकें तथा 90 से अधिक शोध प्रपत्र/आलेख प्रकाशित हैं। एक दशक से अधिक समय तक 'वर्तमान साहित्य' पत्रिका के संपादक मंडल के सदस्य रहे हैं और वर्तमान में 'इरावती' पत्रिका के मुख्य संपादक हैं। प्रो. पालीवाल ने यूजीसी द्वारा प्रायोजित 25 से अधिक पुनश्चर्या पाठयक्रमों में व्याख्यान दिए हैं तथा अनेक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में पत्रवाचन किया है। उनकी रूचि कथा आलोचना में है।
वर्तमान में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा प्रायोजित शोध परियोजना 'स्वाधीन भारत के हिंदी उपन्यासों में जातीय उभार के सामाजिक-राजनीतिक कारण' पर काम कर रहे हैं।
प्रो. पालीवाल को हिंदी साहित्य में उनके योगदान के लिए कई पुरस्कार प्रदान किए गए है। हाल ही में केदार पीठ द्वारा उन्हे हिंदी आलोचना के क्षेत्र में प्रतिष्ठित राम विलास शर्मा पुरस्कार दिया गया है।

bullet अधिष्ठाता -संस्कृति विद्यापीठ

प्रो. मनोज कुमार (जन्म 05 अक्टूबर, 1957) ने एम.ए. (गांधी विचार), पी-एच.डी., एल.एल-बी की उपाधि प्राप्तम की है। लोकतंत्र और विश्व शांति तथा बिहार की भूमि समस्याल नाम से इनकी दो पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी है। इन्होंैने भागलपुर (बिहार) प्रमंडल के पाँच प्रखंडों में पारंपरिक सिंचाई व्य्वस्थाि और जल संरक्षण तथा इस क्षेत्र के बाढ़ एवं सुखाड़ के कारणों पर सर्वेक्षण किया। इस सर्वेक्षण का प्रतिवेदन नवंबर-2006 में प्रकाशित हुआ। इन्होंकने बिहार के सुपौल जिला के मपटिपाही प्रखंड में भूदान की स्थिति का सर्वेक्षण और प्रतिवेदन निर्माण रिसर्च सर्किल और बिहार सर्वोदय मंडल के सहयोग से तैयार कर बिहार सरकार को सौपा। इनके द्वारा पश्चिमी चंपारण के रानीपुर, रामपुरवा पंचायत में बुनियादी शिक्षा की स्थिति का अध्यचयन, गांधी स्मृ ति एवं दर्शन समिति, दिल्लीव के मार्गदर्शन में अप्रैल 2003 में सम्पयन्न‍ किया। इनके द्वारा शांतिपूर्ण समाज की राज्यि इकाई, स्वकराज-बिहार के सहयोग से बिहार के 617 गांव में सहभागी व्यू‍ह रचना द्वारा 78816 लोगों से प्राप्त, तथ्यों के आधार पर समस्यासओं का अध्य यन किया गया जो राज्यग सम्मेजलन में स्वीपकृत हुआ। इन्हें एशियन पीस एवार्ड, राष्ट्रीय कला अकादमी एवं प्रकृति सुरक्षा परिषद द्वारा सम्माीनित किया गया। प्रो. मनोज कुमार देश की विभिन्नक संस्थाओं में अध्यदक्ष, मंत्री, सचिव एवं समन्वायक पद पर रह चुके हैं।


bullet कुलसचिव

डॉ. कैलाश ग्यानसिंह खामरे विश्वविद्यालय के विविध क्षेत्रों में व्यापक अनुभव रखते हैं। वह संत गाडगेबाबा अमरावती विश्वविद्यालय, अमरावती के कुलसचिव पद से सेवानिवृत हुए हैं। इससे पूर्व वह नागपुर विश्वविद्यालय में सहायक कुलसचिव के रूप में अपनी सेवाएँ दे चुके हैं। वर्तमान में वह कुलसचिव पद पर महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में कार्यरत हैं।

उन्होंने प्राणिशास्त्र में एम.एस-सी. एवं पी-एच.डी. उपाधि प्राप्त की है। आपने केपटाउन में शोध प्रपत्र प्रस्तुत किया। 1976 मे कनिष्ठ अध्येता छात्रवृत्ति प्राप्त की। आपको केपटाउन में ‘बुर्सरी अवार्ड’ प्रदान किया गया। कुछ समय के लिए आपने महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालय विकास बोर्ड के निदेशक के रूप में भी कार्य किया। आप कई अकादमिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक समितियों के सदस्य रहे हैं।

प्रशासनिक उत्तरदायित्वों के अतिरिक्त भी आपकी रूचि अकादमिक क्षेत्र में रही है। आपने यूजीसी स्कीम के तहत स्नातक एवं स्नातकोत्तर कक्षाएँ आयोजित की। आपकी रूचि के विषय अकादमिक, प्रशासन, योजना, परीक्षा एवं विश्वविद्यालय विकास हैं।

bullet वित्ताधिकारी

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