डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौध्द-अध्ययन केन्द्र
14 अप्रैल, 2004 में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयन्ती के दौरान कार्यक्रम के अध्यक्ष व तत्कालीन कुलपति प्रो. जी. गोपीनाथन ने सर्वप्रथम डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के -प्रेम एवं भारतीय संविधान निर्माण में विशेष योगदान तथा भारत में बौध्द धम्म को पुनर्जीवित करने के कार्य को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। दलितों तथा आदिवासियों के जीवनयापन एवं संस्कृति के अध्ययन तथा उनके विकास को नई दिशा प्रदान करने की व्यापक दृष्टि से विश्वविद्यालय में 'डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर दलित एवं जनजातीय अधययन केन्द्र' की आधारशिला भी इसी कार्यक्रम के अंतर्गत रखी गई।
जिस प्रकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम विश्वविद्यालय से जुड़ा है, उसी प्रकार इस केन्द्र के नाम के साथ डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन का नाम जुड़ा है तथा बौध्द अध्ययन केन्द्र डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन के नाम पर रखा गया है। भदन्तजी के प्रचार-प्रसार में महत्तव एवं योगदान को देखते हुए उनके नाम पर अध्ययन-केन्द्र का होना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसके अध्ययन, अध्यापन तथा शोधा के सामाजिक व सांस्कृतिक सरोकारों को व्यापक रूप में प्रस्तुत करता है। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सचिव तथा प्रधानमंत्री के रूप में भदन्त जी ने भाषा की बड़े उत्साह एवं समर्पित भाव से सेवा की। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका, जापान, थाइलैण्ड, ब्रिटेन आदि देशों की यात्राएँ भी की। सेवा के लिए उन्हें विद्यालंकार विश्वविद्यालय( श्रीलंका द्वारा मानद डी.लिट्. की उपाधि से सम्मानित किया गया तथा साहित्य सम्मेलन (प्रयाग) द्वारा 'साहित्य वाचस्पति' की उपाधि प्रदान की गई। नालंदा महाविहार की ओर से पालि और बौध्द धर्म की सेवा के लिए उन्हें विद्यापारिध की उपाधि प्रदान की गई।
इस अध्ययन केन्द्र के अंतर्गत अन्य विश्वविद्यालयों से संयुक्त भूमिका के अंतर्गत केलानिया विश्वविद्यालय (श्रीलंका) द्वारा भी सहयोग लिया जाएगा और बौध्दसाहित्य एवं बौध्ददर्शन पर लघु पाठयक्रमों का संयोजन किया जाएगा। दोनों विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों व अध्यापकों को सुविधा प्रदान करेंगे। विश्वविद्यालय अपने बौध्द विद्वानों को अध्ययन केन्द्र के अध्यापक तथा शोधार्थी भेजेंगे तथा अध्ययन के लिए विद्यार्थियों को आमंत्रित किया जाएगा। बाह्य-अतिथियों को विश्वविद्यालय द्वारा आवासीय सुविधा प्रदान की जाएगी। इस प्रकार आनेवाली पीढ़ियों के लिए यह अध्ययन केन्द्र अत्यन्त महत्तवपूर्ण शैक्षिणिक मिसाल कायम करता है।
संचालित पाठयक्रमों का विवरण :
1. बौध्द-अध्ययन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
प्रवेश शुल्क : रु. 1200/-
योग्यता : किसी भी विषय में स्नातक।
शोध-समवाय
शोध समवाय विश्वविद्यालय के शोधार्थियों का एक बौद्धिक मंच है। इसका गठन मार्च 2009 में किया गया है।
उद्देश्य :
- शोध-समवाय का मुख्य उद्देश्य शोधार्थियों को एक मंच प्रदान करना है जहाँ वह विभिन्न कार्यक्रमों/कार्यशालाओं में दखल के माध्यम से अपनी प्रश्नाकूलता को एक अभिव्यक्ति दे सके।
- विभिन्न अंतरानुशासनिक कार्यक्रमों/कार्यशालाओं के माध्यम से शोधार्थियों में मूलभूत संकल्पनाएँ स्पष्ट करना।
- विभिन्न विचारपरक कार्यक्रमों के आयोजन के द्वारा शोधार्थियों में रचनात्मकता का विकास करना।
स्वरूप :
शोध-समवाय के अंतर्गत मुख्यत: दो तरह के कार्यक्रम प्रस्तावित हैं-
- संवाद
(इसके अंतर्गत समसामयिक मुद्दों पर विशेषज्ञों को आमंत्रित किया जाएगा)
- कार्यशाला/गोष्ठी
(इसके अंतर्गत विभिन्न अंतरानुशासनिक विषयों पर कार्यक्रम आयोजित किये जाने का प्रस्ताव है।)
अध्यक्ष : प्रो. नदीम हसनैन, प्रतिकुलपति
संयोजक : राकेश, विशेष कर्तव्याधिकारी(संस्कृति)
समन्वयक : मिथिलेश कुमार, वरिष्ठ शोध अध्येता, अहिंसा एवं शांति अध्ययन विभाग
वर्ष 2009 के लिए
आयोजन समिति का भी गठन किया गया है, जिसमें प्रत्येक विभाग/विद्यापीठ से एक-एक प्रतिनिधि चुने गए हैं।
आयोजित कार्यक्रम :
शोध-समवाय के अंतर्गत अब तक निम्न कार्यक्रम आयोजित किये गए है:-
- 1. संवाद कार्यक्रम -10 फरवरी 2009- प्रो. राम पुनियानी- साम्प्रदायिकता का राजनीति शास्त्र
अ.क्र. |
नाम |
विभाग |
| 1. |
कन्हैया त्रिपाठी |
अहिंसा एवं शांति अध्ययन विभाग |
| 2. |
ज्योतिष पायें |
साहित्य विद्यापीठ |
| 3. |
ममता सिंह |
स्त्री अध्ययन विभाग |
| 4. |
अमितेश्वर पांडे |
भाषा विद्यापीठ |
| 5. |
जर्नादन मिश्रा |
अनुवाद एवं निवर्चन विद्यापीठ |
| 6. |
अमित कुमार विश्वास |
जनसंचार माध्यम एवं सम्प्रेषण |
कार्यशाला/संगोष्टी :
भारतीय एवं विदेशी भाषा प्रगत अध्ययन केन्द्र
यह केन्द्र भारतीय एवं विदेशी भाषाओं एवं पारंपरिक संस्कृति की शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप भारतीयों तथा विदेशियों को शिक्षा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इस केन्द्र के अंतर्गत निम्नलिखित डिप्लोमा/ओरिएन्टेशन/ग्रीष्मकालीन पाठयक्रम चलाए जा रहे हैं।
1.4 डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन (डी.सी.ए.)
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठयक्रम है, जो दो छमाही में पूर्ण होता है। 32 क्रेडिट के इस पाठयक्रम की प्रथम छमाही (सी.सी.ए.) में 16 क्रेडिट एवं द्वितीय छमाही में 16 क्रेडिट होते हैं, जिसमें 4-4 क्रेडिट के दो प्रश्न-पत्र एवं 8 क्रेडिट का एक परियोजना-कार्य होता है।
योग्यता :
डी.सी.ए. के लिए सी.सी.ए. उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
शुल्क
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.1000.00
- परीक्षा शुल्क (प्रथम छमाही+द्वितीय छमाही): रु. 500.00
- कुल : रु.1500.00
1. 2 संस्कृत में डिप्लोमा
इस पाठयक्रम का उद्देश्य संस्कृत भाषा व साहित्य की सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक आधारभूत जानकारी देना है। पाठयक्रम सामग्री में प्राथमिक जानकारी से लेकर संभाषण तक को शामिल किया गया है। यह एक वर्षीय डिप्लोमा पाठयक्रम है।
योग्यता :
किसी भी विषय में 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण ।
शुल्क
डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर दलित एवं जनजाति अध्ययन केन्द्र
Objectives of the Centre:
- Conceptualizing Dalit and Tribal Studies.
- Developing understanding of the nature, scope and dynamics of Dalit and tribal Studies.
- Contextualizing Dalit and Tribal Studies.
- Developing an understanding of Dalit and Tribal Issues.
- Formulating policies for protecting the rights of Dalit and Tribals.
- Understanding Ambedkar thought for the empowerment of the Dalit and Tribal as a means of their release from exploitation and injustice, which are social forms of violence against the oppressed.
- Making comparative studies on marginalized communities in various countries such as Indian Dalits and American Blacks or socially deprived communities of other countries; Indian Tribes and Tribes of other countries and to understand the similarities as well as differences existing in various societies and to study various programmes and methods of empowerment initiated by Governments of various countries.
Functions:
- Teaching courses at the M.A., P.G. Diploma.
- Undertaking M.Phil., & Ph.D. supervision.
- Collecting information on the issues related to Dalit and Tribals and building up a data base.
- Carrying out detailed analyses based on the socio- economic data generated by government agencies.
- Organising regular conferences, seminars and symposia on the issues related to Dalit and Tribals and also on Babasaheb Ambedkar.
- Publishing regularly the research findings of the faculty and students.
- Organising public lectures on the subject by eminent scholars.
- Reaching out to scholars, especially young scholars, in other Universities and colleges both in India and foreign countries through an active program of inviting visiting faculty and Centre’s faculty making visits to other Universities.
- Establishing links with Civil Society Organizations engaged in issues related to the empowerement of Dalit and Tribals within and outside India.
- Short-term Orientation Courses for political Leaders, Parliamentarians, Government Officials, Trade unions and Media Personalities.
- Set up Library and Reading room for teachers and students of the University and for scholars and other readers outside the university, so that an icreasing number of persons become acquainted with the thoughts of Ambedkar and issues related to Dalit and Tribals.
- Conduct a full-time or part time course of about 3 to 6 months, or of similar duration, for a group of teachers/students of the university, functionaries of non-government organizations, corporate executives and government officers, focusing on particular aspects of thinking and work of B.R. Ambedkar and issues related to the empowerment and social justice of Dalit and Tribals.
- Provide teaching support to other university departments by introducing or assisting in existing courses/papers on such studies indicated in different subjects of the department.
- Conduct field work and action programmes on the bassis of constructive programme enunciated by thinkers like Ambedkar and others and action programmes related to the thoughts of such thinkers for empowerment of Dalit and Tribals.
3.1 एम. ए. दलित एवं जनजाति अध्ययन
में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दलित तथा जनजातीय अध्ययन को विस्तार देने की दृष्टि से एम.ए. दलित एवं जनजाति अध्ययन में दो वर्षीय पाठयक्रम चलाया जा रहा है। यह पाठयक्रम चार छमाहियों में पूरा होता है। यह पाठयक्रम 64 क्रेडिट का है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का है। इस पाठयक्रम में कुल 28 सीटें हैं।
योग्यता :
किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक ;10+2+3 पाठयक्रमध्द परीक्षा उत्तीर्ण। ;अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु.250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु.200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क ;वार्षिक : रु.200.00
- चिकित्सा शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु.110.00
- कुल : रु.1605.00
महात्मा गांधी फ्यूजी-गुरुजी शांति अध्ययन केन्द्र
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2006 में विश्वविद्यालय के लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति के लिए नियम और परिनियम के आधार पर महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी सेन्टर फॉर पीस स्टडीज की स्थापना की गई। इस केन्द्र को MG-FG Centre for Peace Studies के नाम से विभूषित किया गया हैं।
केन्द्र का उद्देश्य देश और देश के बाहर शिक्षण, शोध को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय इस केन्द्र के माध्यम से तुलनात्मक धर्म, संस्कृति, तथा शांति के विभिन्न परिप्रेक्ष में अनुसंधान करेंगा। गांधी विचार को ध्यान में रखकर अहिंसा, शांति, संघर्ष-समाधान और अंतरराष्ट्रीय संबंध आदि में भी पाठयक्रम संचालित करेगा। यह केन्द्र विद्यार्थियों और युवाओं के लिए सांस्कृतिक विनिमय (Cross-Cultural-exchange) समवाय बनेगा। संघर्ष-समाधान की पध्दतियाँ विकसित करेगा। मुख्यरूप से गांधीजी और फ्यूजीई गुरूजी के सिध्दान्तों को पाठयक्रम में विकसित करने के अलावा अहिंसा और शांति अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण्ा, संगोष्ठी, परिसंवाद, अंतर्संस्थानिक वादविवाद, व्याख्यान माला, पोस्टर प्रदर्शनी, आलेख प्रतियोगिता का आयोजन करेगा। एम. फिल्. और पीएच्.डी. के माध्यम से यह विभिन्न शोध कार्यक्रमों को भी संपंन्न करने के लिए बहुआयामि विकास का केन्द्र बनेगा।
महात्मा गांधी
विश्वभर में अहिंसा के प्रयोगकर्ता के रूप में महात्मा गांधी का नाम ख्यात है। दूनिया में अमन चैन रहे, इस उद्देश्य से गांधी का जीवन ही दुनिया के लिए संदेश है। जरूरत है उस संदेश को समझने की क्योंकि विकास का मौलिक स्वरूप तभी व्यवस्थित हो सकता है जब अंत:शांति अपने संगत स्वरूप में व्यवस्थित हो। गांधी चिंतन के परिप्रेक्ष में विश्व के तमाम विचाराकों ने यह व्यक्त किया है कि शांति और विकास सिनॉनिम्स (Synonymous) की तरह है। यह स्पष्ट है कि शांति के बिना विकास संभव नहीं है और विकास का आधार सामाजिक शांति है। अत: सामाजिक संरचना में शोषण के अवयव की गवेषणा ही शांति शोध है।
फ्यूजीई गुरूजी (Fuji Guruji)
निकीदात्सू फ्यूजीई गुरूजी (Nichidatsu Fuji Guruji) भारतीय धर्म संस्कृति से प्रभावित हो कर भारत आते है। जापानी बौध्द भिक्षू विश्वशांति के लिए विश्व भ्रमण पर निकलते हैं और अक्टूबर 1933 में महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी से उनकी मुलाकात होती है। गांधी उनकी जापानी प्रार्थना "Na-Mu-Myo-Ho-Rn-Ge-Kyo" से प्रभावित होते है और फ्यूजीई गुरूजी भी गांधी के विचार, व्यवहार और दर्शन से आपलावित हो कर वर्धा में गांधी के सूत्र संधान करते है। आगे चल कर फ्यूजीई गुरूजी भारत-जापान और संपूर्ण विश्व के लिए गांधी और बुध्द के तत्वों से मानवीय शांति के लिए अहिंसक बुनियाद की परिकल्पना में अपना जीवन समर्पण करते है।
महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी शांति अध्ययन केन्द्र द्वारा संचालित पाठयक्रम
समाज के लिए किया गया कार्य या समाज द्वारा किया गया कार्य समाज-व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए ही होता है। सामाजिक-संरचना में जो बदलाव आया है, वहाँ कहीं-न -कहीं टूटन, घूटन और शोषण में समाज विकृत भी हुआ है, अव्यवस्थित भी हुआ है और विकसित भी हुआ है। संरचना के साथ संगत बैठाना ही विकास की गांधीवादी व्यवस्था है। इसकी पूर्ति हेतु केन्द्र द्वारा स्नातकोत्तर समाजकार्य (MSW) का पाठयक्रम प्रारंभ किया गया है।
समाज कार्य में स्नातकोत्तर उपाधि
यह दो-वर्षीय पाठयक्रम है।
योग्यता : समाज कार्य/समाज विज्ञान/मानविकी अध्ययन में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक ;10+2+3 पाठयक्रम परीक्षा उत्तीर्ण ।
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु.250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु.200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क ;वार्षिक : रु.200.00
- चिकित्सा शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु.110.00
- कुल : रु.1605.00
संकाय सदस्य
प्रो. मनोज कुमार
प्रोफेसर/निदेशक
शैक्षणिक योग्यता
एम.ए. (गांधी विचार) एल.एल.बी., पीएच्.डी.
पता :
महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी शांति अध्ययन केन्द्र
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय,
पंचटिला हिल्स, वर्धा-442001 (महाराष्ट्र)
दूरभाष :
07152-201575
चलितभाष :
09975323109
ई-मेल :
director.mgfgps@hindivishwa.org