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मॉरीशस में खुलेगा विश्वविद्यालय का अंतरराष्ट्रीय केन्द्र
अंतरराष्ट्रीय केन्द्र
वर्धा,5सितंबर 2009 (मॉरीशस, पोर्टलुई से लौटकर अमित विश्वास) :मॉरिशस के लोगों के प्रेम व करूणा भाव से मैं बहुत प्रसन्नचित्त हूँ। यहां के लोगों में लेने से ज्यादा देने की भावना निहित है। मॉरीशस भारत का एक अभिन्न अंग सा लगता है। के नाम पर स्थापित देश के एकमात्र महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय,वर्धा की अंतरराष्ट्रीय शाखा लंदन पेरिस से कहीं बेहतर मॉरीशस में होनी चाहिए।जल्द ही मॉरीशस में विश्वविद्यालय का अंतरराष्ट्रीय केन्द्र स्थापित किया जाएगा।
उक्त विचार महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने व्यक्त किए। वे मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुई स्थित स्पीकिंग यूनियन के सभागार भवन में आयोजित स्वागत समारोह के दौरान बोल रहे थे। स्पीकिंग यूनियन के द्वारा कुलपति राय का भव्य स्वागत किया गया। इस अवसर पर साहित्यकार से. रा. यात्री ने कहा कि भारतवर्ष के लोग कही भी जाकर स्वर्ग के कल्पनातीत रूप को साकार कर सकते हैं। प्रवासी भारतीयों ने भारतीय सांस्कृतिक परंपरा व सौन्दर्य को अक्षुण्ण रखा है, यह अदभुत है। उन्होंने आजादी के आंदोलन में की भूमिका का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रीय आन्दोलन को आज भी जीवित रखते तो हमारी संस्कृति और भी विकसित होती।
हाई कमीशन ऑफ इंडिया के सचिव डॉ. जय प्रकाश कर्दम ने कहा कि विभूति नारायण राय साहसिक रचनाकार हैं। भारतीय पुलिस सेवा में रहते हुए अपनी रचनाओं के माध्यम से सहयोगियों पर टिप्पणी करना साहसिक कार्य है। 'शहर में कर्फ्यू' पढ़कर लेखक राय को सलाम करता हूँ। विश्व सचिवालय, मॉरीशस के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल डॉ. राजेन्द प्रसाद मिश्र ने कुलपति राय को सशक्त रचनाकार बताते हुए कहा कि पुलिस सेवा में रहते हुए संवेदना से जुड़कर साहित्य रचना हमें बहुत ही आकर्षित करता है। कुलपति जी यहां पर अपनी शाखा खोलने जा रहे हैं इससे भारत और मॉरीशस का संबंध और भी प्रगाढ़ होगा। मॉरीशस के साहित्यकार डॉ.रामदेव धुरंधर ने कुलपति राय की साहित्य सेवा का उल्लेख करते हुए कहा कि वे अपनी रचनाओं के माध्यम से राज्य के चरित्र का खुलासा करते हैं।
अध्यक्षीय वक्तव्य में साहित्यकार अजामिल माताबदल ने कहा कि आपके आने से हमें लगता है कि भारत आ गया है, हमारे पूर्वज आ गए हैं। इस अवसर पर इन्द्रदेव भोला इन्द्रनाथ सहित कई लेखकों ने कुलपति राय को पुस्तकें भेंट देकर स्वागत किया। स्वागत समारोह में मॉरीशसवासियों के अलावा भारत से आए सदानन्द शाही, प्रभात खबर के संपादक स्वयं प्रकाश, महुआ चैनल के पत्रकार जय प्रकाश, अमित पाण्डेय, जे.एन.य.ू के देवेन्द्र चौबे, जे.पी. विश्वविद्यालय बिहार के प्रो. वीरेन्द्र यादव, लाल बाबू यादव सहित के साहित्यकार, कवि, आलोचक उपस्थित थे।
विश्वविद्यालय में दिसम्बर में आएंगे मॉरीशस के राष्ट्रपति
वर्धा,5 सितंबर 2009 (मॉरीशस, पोर्टलुई से लौटकर अमित विश्वास) :मॉरीशस में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन में विशिष्ट अतिथि के रूप में आए महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय ने मॉरीशस के राष्ट्रपति महामहिम सर अनिरूध्द जगन्नाथ से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान उन्होंने महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के बारे में बताया तो वे विश्वविद्यालय के संबंध में जानकर अति प्रसन्न हुए। कुलपति राय ने राष्ट्रपति जी को विश्वविद्यालय में आने का निमंत्रण दिया, तो उन्होंने निमंत्रण स्वीकार करते हुए कहा कि 'मैं अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में आना चाहता हूँ।'
आगामी दिसम्बर माह में मॉरीशस के राष्ट्रपति विश्वविद्यालय के ऐतिहासिक दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे तथा वे फादर कामिल बुल्के अंतरराष्ट्रीय छात्रावास का उद्धाटन भी करेंगे। राष्ट्रपति जगन्नाथ ने नागपुरवासियों से मिलने की मंशा व्यक्त की। वे वर्धा में गांधीकुटी व पवनार आश्रम भी जाएंगे। इस अवसर पर कुलपति विभूति नारायण राय ने राष्ट्रपति जगन्नाथ को विश्वविद्यालय का स्मृति चिन्ह व प्रकाशित रचनाएं भेंट स्वरूप देकर स्वागत किया। साथ ही साहित्यकार से.रा.यात्री ने राष्ट्रपति अनिरूध्द जगन्नाथ को शाल पहनाकर स्वागत किया। राष्ट्रपति से कुलपति राय की औपचारिक भेंट के अवसर पर विश्व सचिवालय के डिप्टी सेक्रेटरी जनरल डॉ. राजेन्द्र प्रसाद मिश्र, महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, वर्धा के अमित विश्वास उपस्थित थे।
के लिए भोजपुरी करेगी खाद का काम
मॉरीशस में आयोजित विश्व भोजपुरी संमेलन के दौरान कुलपति राय का वक्तव्य
वर्धा, 7 सितंबर 2009 (पोर्टलुई, मॉरीशस से लौटकर अमित विश्वास) : प्रवासी भारतीयों ने सात समुंदर पार भी भारतीय सांस्कृतिक विरासत को बचाये रखा है। प्रवासी भारतीयों के लिए अध्ययन हेतु माहत्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा में पहली बार भारतवंशीय अध्ययन केन्द्र शुरू किया गया है। भोजपुरी, अवधी, मैथिली, ब्रज जैसी भाषाएँ की ताकत है। भोजपुरी के लिए खाद की तरह काम करती है। हमें चाहिए कि किसी भी परिस्थिति में का अहित न होने पाएं।
उक्त उद्बोधन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय ने व्यक्त किए। वे इंदिरा गांधी कल्चरल सेन्टर, फोनिक्स, मॉरीशस में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन के दूसरे दिन विशिष्ट अतिथि के रूप में बोल रहे थे। मंच पर श्रमजीवी पत्रकार संघ के अध्यक्ष के. विक्रम राव, भारतीय विमानन प्राधिकरण के श्री दूबे, हॉलेण्ड के डॉ. कुमार गौरीचरण, विश्व भोजपुरी संमेलन के अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी, उपाध्यक्ष जगदीश गोवर्धन, महासचिव अरूनेश नीरन आदि उपस्थित थे।
इस दौरान हॉलैण्ड के डॉ. गौरीचरन ने कहा कि भोजपुरी कैंची की तरह नहीं अपितु सुई तरह भाषाओं को जोड़ने का काम करती है। पत्रकार के. विक्रमराव ने कहा कि दो बहनों (भोजपुरी-) में हमारी लड़ाई नहीं है अपितु हमारी लड़ाई औपनिवेशिक भाषा अंग्रेजी से है। महात्मा गांधी संस्थान, मॉरीशस की प्रा. संगीता ने भोजपुरी को भाव, संस्कृति व विज्ञान की भाषा बताते हुए कहा कि मॉरीशस में को मान्यता मिल गई है इसे विश्वविद्यालय स्तर पर पाठ्क्रम में चलाने की जरूरत है। राँची विश्वविद्यालय के प्रो.जी.वी. पाण्डेय ने कहा कि मॉरीशस एक ऐसा देश है जहाँ विविध भाषा-भाषी, संस्कृति के लोग रहते हैं। यहाँ का हर लोग एक माली हैं। मंच का संचालन जगदीश गोवर्धन ने किया। सम्मेलन में नीदरलैण्ड के सुर्यप्रसाद वीरे, हॉलैण्ड के कोईमर गौरीचरण, राजमोहन, य.ूके. के लॉक सोहोदेव शशि, सुलभ सेनीटेशन एण्ड सोशल रिफार्म के संस्थापक बिंदेश्वरी पाठक, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली के ब्रिजेन्द्र त्रिपाठी, सामना के संपादक प्रेम शुक्ल, प्रभात खबर पटना के संपादक स्वयंप्रकाश सहित विश्वभर के करीब पाँच सौ प्रतिनिधि उपस्थित थे।
भोजपुरी श्रम की भाषा
विश्व भोजपुरी सम्मेलन के उद्धाटन के अवसर पर मॉरीशस के राष्ट्रपति अनिरूध्द जगन्नाथ का उद्बोधन
वर्धा,5 सितंबर 2009 (मॉरीशस, पोर्टलुई से लौटकर अमित विश्वास) : भारत भोजपुरी का उद्गम स्थान है। 39 मजदूरों ने सोना पाने की आस में अपने सोने जैसे शरीर को गलाकर यहां की मिट्टी को हरा-भरा कर दिया । गिरमिटिया कहे जाने वाले मजदूरों ने भारतीय सांस्कृतिक विरासत को न सिर्फ बचाए रखा अपितु इसे विकसित भी किया। हमें नये जमाने के अनुसार भोजपुरी का विकास करना चाहिए। वासुदेव विष्णुदयाल कॉलेज, मॉरीशस में भोजपुरी की पढ़ाई दस वर्षों से हो रही है। 'सब लोग भोजपुरी भाषा की ओर चलत जा रहल बा अउर ई भाषा के जिवित रखल जाई।'
उक्त उद्बोधन मॉरीशस के राष्ट्रपति सर अनिरूध्द जगन्नाथ ने व्यक्त किए। वे मॉरीशस, फोनिक्स स्थित इंदिरा गांधी कल्चरल सेन्टर के सभागार भवन में आयोजित चतुर्थ विश्व भोजपुरी सम्मेलन के उद्धाटन के उपरान्त सभा को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर श्रीमती अनिरूध्द जगन्नाथ, मॉरीशस के शिक्षा एवं संस्कृति मंत्री डॉ. वसंत बनवारी, श्रीमती बनवारी, एक्टिंग हाई कमीश्नर संजीव रंजन, प्रो. डी एस सक्सेना, रामनाथ जीता सम्मेलन के अध्यक्ष सतीश त्रिपाठी, उपाध्यक्ष जगदीश गोवर्धन, महासचिव अरूनेश नीरन उपस्थित थे।
इस अवसर पर शिक्षा मंत्री श्री बनवारी ने मॉरीशस में सम्मेलन आयोजित करने के लिए खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि इस सम्मेलन से भोजपुरी भाषा व संस्कृति को विकसित करने के लिए विचार विमर्श होगा क्योंकि हम अपनी भाषा संस्कृति की रक्षा नही करेंगे तो हम मर जाएंगे। उन्होंने संगीत के माध्यम से भोजपुरी का विकास हो रहा है, का उल्लेख करते हुए कहा कि भोजपुरी भाषा संस्कृति के संवर्धन हेतु भोजपुरी संगीत की एल्बम तैयार करने के लिए मंत्रालय आर्थिक सहयोग भी देगा। इस दौरान प्रो. डी. एस. सक्सेना ने कहा कि भोजपुरी संगीतमय मीठी भाषा है। भोजपुरी का विस्तार वैश्विक स्तर पर हो रहा है। अमेरिका के राष्ट्रपति ओबामा ने अपने अधिकारियों से भाषा जानने के संबंध में जो सूची दी थी उसमें भोजपुरी भी शामिल थी। मातृभाषा ही सांस्कृतिक विकास की संवाहिका होती है का उल्लेख करते हुए एक्टिंग हाई कमिश्नर श्री रंजन ने कहा कि भारत और भारत के बाहर भोजपुरी में रचनाएं हो रही हैं।
मीडिया के माध्यम से भोजपुरी गंगा की धार में प्रवाहित हो रही हैं। मॉरीशस के साहित्यकार रामनाथ जीता ने कहा कि भारतीय मजदूर पाँच वर्ष के ठेके पर यहां आये थे यह सोच कर कि हमारे भगवान रामचंद्र जी चौदह वर्ष जंगल में बिताए थे, हम पांच वर्ष के बाद फिर अपने घर चले जाएंगे पर वे यहीं बस गए और उन्होंने अपने श्रम से मॉरीशस को स्वर्ग जैसा बना दिया। पुराने लोग भोजपुरी को जीवित रखें हैं नयी पीढियां इसे भूलती जा रही हैं। भारत से हम आशा करते हैं कि हमें पाठय पुस्तकें उपलब्ध कराएं। हमें चाहिए कि हम अपने बच्चों को एक-दो शब्द भोजपुरी की सिखाएँ, इससे भोजपुरी विकसित हो सकेगी। इस अवसर पर सम्मेलन की ओर से राष्ट्रपति, शिक्षा मंत्री को 'विश्व भोजपुरी सम्मान' से सम्मानित भी किया गया। मंच का संचालन जगदीश गोवर्धन ने किया। सम्मेलन में नीदरलैण्ड के सुर्यप्रसाद वीरे, हॉलैण्ड के कोईमर गौरीचरण, राजमोहन, य.ूके. के लॉक सोहोदेव शशि भारत से महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के कुलपति विभूति नारायण राय, सुलभ सेनीटेशन एण्ड सोशल रिफार्म के संस्थापक बिंदेश्वरी पाठक, साहित्य अकादमी नई दिल्ली के ब्रिजेन्द्र त्रिपाठी, सामना के संपादक प्रेम शुक्ल, प्रभात खबर पटना के संपादक स्वयंप्रकाश सहित विश्वभर के करीब पाँच सौ प्रतिनिधि उपस्थित थे।
भोजपुरी है प्रतिरोध की भाषा
मॉरीशस में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मेलन में कुलपति विभूति नारायण राय का वक्तव्य
वर्धा 9 सितम्बर, 2009 : (मॉरीशस, पोर्टलुई से लौटकर अमित विश्वास) : भारत से मजदूरों को सब्ज़बाग दिखाकर मॉरीशस लाया गया था। ये मजदूर मेहनत करते और अपने दु:ख-दर्द को अपनी मातृभाषा भोजपुरी भाषा में व्यक्त करते थे। भोजपुरी श्रम की भाषा है, इसमें प्रतिरोध की चेतना व्याप्त है।
उक्त उद्बोधन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने व्यक्त किए। वे इंदिरा गांधी कल्चरल सेन्टर, फोनिक्स, मॉरीशस में आयोजित चतुर्थ विश्व भोजपुरी सम्मेलन में 'विश्व क्षितिज पर भोजपुरी' सत्र की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे। भोजपुरी भाषा के विकास का ज़िक्र करते हुए कुलपति राय ने कहा कि वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुसार भोजपुरी को रोजगार से जोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि हमारे समाज में जहाँ भी भ्रष्टचार दिखाई पड़ता ह,ै वहाँ भोजपुरी भाषा खड़ी दिखती है। दुर्भाग्य से आज हम अपसंस्कृति की ओर प्रवृत्त हो रहे हैं। हमें सोचना होगा कि भोजपुरी का मतलब अपसंस्कृति न हो।
इस अवसर पर आगरा विश्वविद्यालय के प्रो. सी. पी. राय ने प्रवासी भारतीयों के पूर्वजों को खोजने के लिए 'चलें जड़ों की ओर' अभियान चलाने की मांग की। बनारस हिन्दु विश्वविद्यालय, वाराणसी के सदानंद शाही ने भोजपुरी भाषा के संबंध में चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि भोजपुरी भाषा को नई पीढियों से जोड़ना होगा। इस दौरान कई साहित्यकारों ने भोजपुरी भाषा के विकास एवं संवर्धन हेतु अपने विचार प्रस्तुत किए। मंच का संचालन साहित्यकार सदानंद शाही ने किया। इस अवसर पर विश्वभर से आए करीब डेढ़ सौ प्रतिनिधि उपस्थित थे।
भारतीय भाषाओं के समन्वय से होगा देश का विकास
विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली पर आयोजित त्रिदिवसीय संगोष्ठी के उद्धाटन अवसर पर विशिष्ट अतिथि से.रा. यात्री का उद्बोधन
वर्धा, 14 सितम्बर, 2009: आजादी के 62 वर्षों के बाद भी अंग्रेजी भारतीय भाषाओं का शोषण कर रही हैं। राजनीतिक कारणों से का विरोध होता रहा है। यह बिडम्बना की बात है कि अंग्रेजी को संसार की उत्कृष्ठ भाषा माना जाता है। अंग्रेजी अनुवाद की भाषा है इसने केवल विश्व की भाषाओं के क्लासिक रचनाओं का अनुवाद कर लिया है। अगर हम 60 वर्ष पहले राहुल सांस्कृत्यायन द्वारा कहे गए बातों को अपना लेते तो आज की स्थिति बेहतर होती। की कमजोरी यह है कि प्रदेश वाले तर भाषा के लोगों को सिखाना चाहते हैं पर अपने आप दूसरी भाषा सीखना नहीं चाहते हैं, भारतीय भाषाओं के साथ समन्वय स्थापित करने से देश का विकास होगा।
उक्त उद्बोधन वरिष्ठ साहित्यकार से. रा. यात्री ने व्यक्त किए। वे मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार, नई दिल्ली के वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग तथा महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के संयुक्त तत्वावधान में '' तथा भारतीय भाषाओं में मानविकी एवं समाज विज्ञान विषयों के अंतर्गत तकनीकी शब्दावली का अनुप्रयोग एवं संभावनाएँ विषय पर विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित त्रिदिवसीय (14 से 16 सितम्बर) राष्ट्रीय संगोष्टी के उद्धाटन अवसर पर प्रमुख अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उद्धाटन समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति मानवशास्त्री प्रो. नदीम हसनैन ने की। इस अवसर पर वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के सहायक निदेशक उमाकांत खुबालकर व विश्वविद्यालय के भाषा विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो उमाशंकर उपाध्याय मंच पर उपस्थित थे।
साहित्यकार से. रा. यात्री ने आंचालिक भाषाओं से भी का विस्तार करने पर बल देते हुए कहा कि हमें शिक्षाशास्त्रियों को उन अंचलों से लाने की जरूरत है जो आंचालिक भाषा की क्षमता को पहचानते हैं। हमें इस बात की पड़ताल करनी चाहिए कि जो शब्द में नहीं है, वह प्रांतीय बोली व भाषाओ में है तो इससे भाषा को समृध्द करने की जरूरत है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रतिकुलपति प्रो. नदीम हसनैन ने कहा कि भाषा का विकास करते समय हमें इंडिया और भारत के साथ-साथ हिन्दुस्तनवां अर्थात आदिवासी, दलित एवं स्त्रियों के विकास के बारे में सोचना पड़ेगा। उन्होने कहा कि विज्ञान एवं तकनीक के संबंध में कहा जाता है कि यहाँ अंग्रेजी के बिना काम नही चल सकता है जो कि हमें सही नहीं लगता है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण जापान है जिसने अपनी जापानी भाषा को अपनाकर ही आज विज्ञान एवं तकनीक के क्षेत्र में दुनिया में अग्रणी देश है। इससे हमें सबक लेनी चाहिए।
विश्वविद्यालय की स्थापना के उद्देश्य के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि यह विश्वविद्यालय भाषा के माध्यम से अनुंसधान कार्य को बढ़ावा देने हेतु कृतसंकल्पित है। साथ ही, को विश्वभाषा के रूप में विकसित करना भी विश्वविद्यालय का प्रमुख उद्देश्य है। इस दिशा में कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय माध्यम से मौलिक लेखन एवं अध्ययन-अध्यापन को बढ़ावा दे रहा है।
वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग के सहायक निदेशक उमाकांत खुबालकर ने महामानव महात्मा गांधी एवं विनाबा भावे की कर्मस्थली वर्धा में दिवस के सुअवसर पर संगोष्ठी आयोजित करने के लिए हर्ष व्यक्त करते हुए कहा कि आयोग ने साढ़े आठ लाख शब्द निर्मित किए हैं। आयोग कृषि, अभियांत्रिकी , कला समाजविज्ञान, मानवविज्ञान के क्षेत्रों में शब्द निर्मित किए हैं। हमें चाहिए कि दृढ़ इच्छाशक्ति से आयोग द्वारा निर्मित शब्दावली का प्रयोग करें। संगोष्ठी के बारे में उन्हाेंने बताया कि आयोग शब्दों के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ शब्दों के सरलीकरण एवं मानवीकरण तथा अद्यतनीकरण करती है।
प्रो.उमाशंकर उपाध्याय ने अपने स्वागत व्यतव्य में कहा कि केन्द्रीय भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर द्वारा अस्सी के दशक में कराए गए एक शोध से यह स्पष्ट होता है कि देश की सभी चौदह भाषाओं में केवल ही 68.42 प्रतिशत लोगों की अंतर भाषायी संवाद की भाषा है। इसमें अंग्रेजी का प्रतिशत मात्र 0.41 है। इससे नीचे केवल दो ही भारतीय भाषाएं है। इस प्रकार देश की 99.59 प्रतिशत जनता अंतरभाषायी संवाद में अपने देश की भाषा इस्तेमाल करती है।
मंच का संचालन भाषा विद्यापाठ के व्याख्याता डॉ. अनिल दूबे ने किया तथा डॉ अनिल पाण्डेय ने आभार माना। समारोह की शुरुआत दीप प्रज्वलन से हुई। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं ने पूज्य बापू के प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो तैने कहिए' प्रस्तुत किया। इस अवसर पर नेहु, शिलांग के डॉ सुशील कुमार शर्मा, दिल्ली विश्वविद्यालय के राजेन्द्र गौतम, आयोग के पूर्व सहायक निदेशक जय सिंह, डॉ. बालसुब्रमण्यम, डॉ. कन्हैयालाल भट्ट, प्रो. निरंकुश खुबालकर, डॉ. देवेन्द्र स्वामी, सुनीता पाडर, डॉ. दया पांडे, डॉ. किशोर गिरडकर, प्रा. राजेन्द्र मुंढे, प्रा. निंबालकर, डॉ. फिरोज हैदरी सहित देशभर के सौ प्रतिनिधि, विश्वविद्यालय के शैक्षणिक, गैर- शैक्षणिक कर्मी, शोधार्थी व विद्यार्थी उपस्थित थे।
पुस्तक प्रदर्शनी
संगोष्ठी के दौरान वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा प्रकाशित ग्रंथों की पुस्तक प्रदर्शनी भी लगाई गई। इस प्रदर्शनी में आयोग से आए जय भगवान शर्मा एवं रामदास प्रमुखता से उपस्थित थे। संगोष्ठी में शामिल प्रतिनिधियों व विश्वविद्यालय के शोधार्थी व विद्यार्थियों ने पुस्तक प्रर्दशनी में दिए जा रहे भारी छूट का लाभ उठाकर खूब पुस्तकें खरीदी।
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