बहुवचन, पुस्तक वार्ता और विमर्श का लोकार्पण
दिल भरा है... वैसे ही जैसे यह हॉल भरा है: के वरिष्ठतम आलोचक और महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रो. नामवर सिंह ने जब त्रिवेणी सभागार नई दिल्ली में यह वाक्य कहा तो बरबस लोगों का ध्यान गया कि खचाखच भरे त्रिवेणी सभागार में न सिर्फ साहित्य बल्कि इतिहास, समाजशास्त्र, नाटक, पत्रकारिता जैसे तमाम अनुशासनों की जानीमानी हस्तियाँ विराजमान थी।
 mअवसर था महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय की तीन महत्वपूर्ण पत्रिकाओं बहुवचन लैंग्वेज डिस्कोर्स एण्ड राइटिंग तथा पुस्तकवार्ता के नये स्वरूप एवं कलेवर में प्रकाशित अंको के लोकार्पण का ! इनको लोकार्पित करने के लिये जहाँ मंच पर कुलाधिपति नामवर सिंह एवं कुलपति विभूति नारायण राय के साथ वरिष्ठ कवि कुँवर नारायण, पूर्व कुलपति एवं कवि-आलोचक अशोक वाजपेयी, प्रख्यात संपादक एवं कलाकार राजेन्द्र यादव बैठे थे वही इसके साक्षियों में प्रो. सुधीरचंद्र, प्रो. निर्मला जैन, रवीन्द्र कालिया, राज बिसारिया, पद्मा सचदेव, प्रो. सुधीर पचौरी, अखिलेश, देवेन्द्रराज अंकुर, ब्रजेन्द्र त्रिपाठी, अभय कुमार दूबे, नीलाभ, गंगाप्रसाद विमल, उपेन्द्र कुमार, अनंत विजय, रविकांत जैसी हस्तियाँ मौजूद थी।
प्रो. नामवर सिंह ने आगे कहा कि ये पत्रिकाएँ सिर्फ विश्वविद्यालय की ही सम्पत्ति नहीं है, बल्कि समूचे समाज का भी इनपर हक है। इसलिये इसके संपादको को लगातार इस बात पर चौकस रहना होगा कि की बहुलता और इसकी लोकतांत्रिकता किसी भी तरीके से बाधित न होने पाये। उन्होंने खासकर पुस्तक वार्ता की चर्चा करते हुए एक ऐसे टीम की आवश्यकता पर जोर दिया जो समीक्षा पुस्तकों के संदर्भ में संपादक को उचित सुझाव दे सके।
बहुवचन के नये स्वरूप का लोकार्पण करते हुए वरिष्ठ कवि कुँवर नारायण ने पत्रिका के नये स्वरूप पर प्रसन्नता जाहिर की और यह उम्मीद जताई कि इन पत्रिकाओं में अकादमिकता और सर्जनात्मकता का विलक्षण संयोग दिखाई पडेग़ा।
विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और कवि आलोचक अशोक वाजपेयी ने : लैग्वेज डिस्कोर्स एवं राइटिंग का लोकार्पण करते हुए कहा कि जब उन्होंने इन पत्रिकाओं की अवधारणा समाज के सामने रखी थी तो इस बात को समझने में लोगों ने काफी वक्त लिया कि पढ़ने-पढ़ाने के अलावा तमाम विश्वविख्यात विश्वविद्यालय अपने महत्वपूर्ण प्रकाशनों से जाने गये। अपनी अवधारणाओं की स्वीकृति से प्रसन्न वाजपेयी जी ने आगे कहा कि में उन शोधार्थियों और अध्येताओं के काम को भी स्थान मिलना चाहिये जो विदेशों में रहकर अपना काम कर रहे हैं।
पुस्तक वार्ता के नये स्वरूप का लोकार्पण करते हुए राजेन्द्र यादव ने संस्थानिक पत्रिकाओं के सामाजिक भूमिका के उचित निर्वहन के प्रति अपनी आशंकाएँ जताईं। उन्होंने इतिहास में सरस्वती और चाँद के हवाले से कहा कि व्यक्तिगत प्रयासों से निकलने के कारण ही चाँद से ज्यादा क्रांतिकारी साबित हो सका। उन्होंने अशोक वाजपेयी पर चुटकी लेते हुए कहा कि संस्थानिक पत्रिकाओं में कला के सुरक्षित इस्तेमाल से किसी को न तो दिक्कत होती है और न ही उसमें कोई जोखिम ही होता है। इस अवसर पर तीनों पत्रिकाओं के नये संपादकों ने भी अपनी संपादकीय नीति पर चर्चा की। बहुवचन के नये संपादक प्रो. राजेन्द्र कुमार ने साहित्य में बहुलतावाद के प्रति अपनी आस्था पर पुरजोर विश्वास व्यक्त किया और कहा कि बहुवचन सच्चे अर्थों में 'हजार फूलों को खिलने दो' का प्रतिबिम्ब साबित होगा।
की नई संपादिका महत्वपूर्ण कहानीकार ममता कालिया ने यह विश्वास व्यक्त किया कि जो महत्वपूर्ण जिममेदारी उनके पास आई है, जिसके माध्यम से समूचे विश्व में की समुचित स्वीकृति संभव हो सके इसमें व्यापक समाज का सहयोग उन्हें प्राप्त होगा। उन्होंने अंकों की स्वायत्तता के लिये विश्वविद्यालय के प्रति आभार भी व्यक्त किया।
पुस्तक-वार्ता के नये संपादक भारत भारद्वाज ने कहा कि स्कूल जीवन से वह पत्रिकाओं के संपादक रहे हैं। अव विश्वविद्यालय की पत्रिका के संपादन का अवसर पाकर वे गौरवान्वित है और वे व्यापक समाज भी अपेक्षाओं पर अवश्य खरा उतरेंगे।
प्रारंभ में विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की पत्रिकाओं में कुलपति का नाम प्रधान सम्पादक के रूप में जाय, इसका कोई औचित्य उन्हें नहीं लगता। इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि सभी पत्रिकाओं के संपादक अपने चयन में स्वतंत्र होंगे, और उन्हें किसी भी तरह के दबाव में आने की जरूरत नहीं होगी।
कार्यक्रम का संचालन विश्वविद्यालय के संस्कृति विभाग के व्याख्याता राकेश मिश्रा ने किया तथा आभार विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश ने माना।
अनुवाद के लिए तटस्थ वैज्ञानिक सोच की आवश्यकता-प्रो. गोपीनाथन
विभिन्न भारतीय भाषाओं में अनुवाद की कमी होने से भाषाओं की प्रगति नहीं हो पा रही है। गुणवत्तापूर्ण अनुवाद के लिए अनुवादकों को तटस्थ वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखकर कार्य करने की आवश्यकता है। उक्त प्रतिपादन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा के पूर्व कुलपति तथा अनुवादविद् प्रो. जी. गोपीनाथन ने किया। वे विश्वविद्यालय के अंतर्गत अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ द्वारा 'पाठ विश्लेषण एवं अनुवाद मूल्यांकन : दिशाएं और चुनौतियां' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्धाटन के अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में बोल रहे थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रतिकुलपति प्रो. नदीम हसनैन ने की।
विश्वविद्यालय में नवनिर्मित अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के भवन में द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का उद्धाटन दीपप्रज्ज्वलन कर हुआ। इस अवसर पर बीज वक्तव्य में प्रो. गोपीनाथन अनुवाद के विभिन्न पहलुओं को छूते हुए कहा कि अनुवाद प्रौद्योगिकी के अनेक लक्ष्य है तथा अनुवाद पाठयक्रम एक नई दिशा है। अनुवाद में अंतरण तथा अर्थतत्व संरचना है। पाठ विश्लेषण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अनुवाद करते समय अनुवादक पाठ का विकोडीकरण्ा करता है। परंतु ऐसा करते समय उसके सामने अनेक प्रकार की समस्याएं आती है। उन्होंने कहा कि आलोचकों को सांस्कृतिक संदर्भ का विश्लेषण कर अनुवादकों को उनके अनुवाद के बारे में समझना होगा।
उद्धाटन समारोह में अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के डीन प्रो. आत्म प्रकाश श्रीवास्तव ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि पाठ विश्लेषण भाषा विज्ञान के केन्द्र में है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस संगोष्ठी में देशभर से आए भाषाविद् एवं अनुवादविद् की उपस्थिति से विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन की पहल सार्थक सिध्द होगी। कार्यक्रम का संचालन डॉ. अनवर अहमद सिद्दीेकी ने किया। इस अवसर पर प्रो. दिलीप सिंह, चेन्नई, प्रो. जगदीश प्रसाद डिमरी, हैदराबाद, प्रो. नरेश मिश्र, रोहतक (हरियाना), डॉ. के. एम. मालती, कालीकट, प्रो. उमाशंकर उपाध्याय, प्रो. राम प्रकाश सक्सेना, नागपुर, प्रो. शंकर बुंदेले, अमरावती, प्रो. एम. व्यंकटेश्वर, हैदराबाद, सूर्यप्रसाद दीक्षित, लखनऊ प्रो. एन. सुंदरम, कुलसचिव राकेश, विशेष कर्तव्याधिकारी नरेन्द्र सिंह, प्रो. महेन्द्र कुमार पाण्डेय, डॉ. एम. एम. मंगोड़ी, उमेश कुमार सिंह, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ. अन्नपूर्णा चेर्ला, पी. शंकर, कोचीन, डॉ. अनिल कुमार पाण्डेय शैलेष कदम मरजी, गिरीश पाण्डेय, श्रीरमन मिश्र, बी. एस. मिरगे सहित छात्र छात्राएं उपस्थित थे।
इस राष्ट्रीय संगोष्ठी के समापन 4 अप्रैल को होगा। सुबह 10.00 बजे तीसरा सत्र 'अनूदित साहित्यिक पाठों का मूल्यांकन' विषय पर होगा जिसकी अध्यक्षता प्रो. के. के. गोस्वामी, दिल्ली करेंगे तथा प्रो. एन. सुंदरम्, चेन्नई, डॉ. आृलोक गुप्ता, अहमदाबाद, प्रो. शंकर बुंदेले, अमरावती प्रमुख वक्ता होंगे। प्रो. उमाशंकर उपाध्याय की अध्यक्षता में चौथा सत्र 'अनूदित साहित्येतर पाठों का मूल्यांकन' विषय पर होगा। सत्र में प्रो. एम. व्यंकटेश्वर, हैदराबाद,प्रो. कृष्ण कुमार गोस्वामी, प्रो. रामप्रकाश सक्सेना, नागपुर शामिल होंगे। समापन सत्र की अध्यक्षता कुलसचिव राकेश करेंगे।
एम. आई. एल. ई. पाठ्यक्रम होगा रोजगारपरक - प्रो. नदीम का प्रतिपादन
तकनीकी ज्ञान-विज्ञान के उभरते हुए परिप्रेक्ष्य में विश्वविद्यालय द्वारा प्रायोजित मास्टर आफ इन्फारमेटिक्स एण्ड लैग्वेंज इंजीनियरिंग (एम.आई.एल.ई.) एवं पी.एच.डी. (इन्फारमेटिक्स एण्ड लैग्वेंज इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम छात्रों के लिए लाभकारी एवं रोजगारपरक सिध्द होगा. यह प्रतिपादन महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. नदीम हसनैन ने किया, वे विश्वविद्यालय के भाषा विद्यापीठ के अंतर्गत प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र द्वारा मास्टर आफ इन्फारमेटिक्स एण्ड लैग्वेंज इंजीनियरिंग (एम.आई.एल.ई.) एवं पी.एच.डी. (इन्फारमेटिक्स एण्ड लैग्वेंज इंजीनियरिंग) पाठ्यक्रम निर्माण हेतु जाजूवाडी विस्तार पटल कार्यालय में आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के उदघाटन समारोह की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थें रेलवे मंत्रालय के राजभाषा विभाग के पूर्व निदेशक प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा, कुलसचिव राकेश श्रीवास्तव, अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. आत्मप्रकाश श्रीवास्तव, उत्तर महाराष्ट्र विश्वविद्यालय के कम्प्युटर साइंस विभाग के रीडर डॉ. राम भावसार, उपस्थित थे. प्रो. नदीम हसनैन ने कहा कि, विश्वविद्यालय में विद्यमान तथा प्रायोजित रोजगारपरक तमाम पाठ्यक्रमों के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं होगी. उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे रोजगारपरक पाठ्यक्रम में देश भर से विद्यार्थी वर्धा आएंगे और वे क्रीम बनकर बाहर निकलेंगे. प्रो. विजय कुमार मल्होत्रा, भाषा विद्यापीठ के अधिष्ठाता तथा प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र के निदेशक, प्रो. महेन्द्र कुमार सी. पाण्डेय, कार्यकारी कुलसचिव श्री रोकश श्रीवास्वव ने भी विचार व्यक्त किये, संचालन भाषा प्रौद्योगिकी के प्रभारी अध्यक्ष डाँ. अनिलकुमार पाण्डेय ने किया एवम डॉ. अनिल कुमार दुबे ने आभार माना|
मणिपुरी सांस्कृतिक संध्या - रंगारंग प्रस्तुति से विद्यार्थी हुए सराबोर
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के मुख्य परीसर में होली के सुअवसर पर विश्वविद्यालय में स्थापित ब.व. कारन्त नाट्य परिषद् की ओर से आयोजित रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम में मणिपुर के श्री गोविन्दजी नट संकीर्तन व नीमिता देवी नृत्य आश्रम इम्फाल के २१ कलाकारों ने दर्शकों का मन मोह लिया।

मणिपुरी सांस्कृतिक संध्या के इस कार्यक्रम के दौरान पुंग चोलोम एवं रास लीला की प्रस्तुति की गई। साथ ही कलाकारों ने मायबी नृत्य, लाय हराओबा नृत्य माणिपुरी वेश-भूषा में प्रस्तुत किये। लाय हराओबा नृत्य मणिपुर का पारम्परिक नृत्य है यह नृत्य आदिम संस्कृति के पुरातन लोगों का एक प्रतिबिम्ब है। इस नृत्य में स्त्री और पुरूष शांति व समृद्धि के लिए देवी देवताओं के समक्ष आराधना के लिए किया करते हैं। ढोल चोलोम नृत्य होली के सुअवसर पर खुशी का इजहार करने के लिए जाता है। विश्वविद्यालय में ढोल चोलम नृत्य की प्रस्तुति ने लोगों का दिल जीत लिया। थांग अहुम यान्नबा (तीन तलवारों की टकराहट) कला प्रदर्शन द्वारा युध्द के समय रक्षा हेतु कवच ढाल को बखूबी ढंग से प्रस्तुत किया गया। बसंत रास नृत्य में पूर्णिमा की रात्रि में कृष्ण गोपियों के संग के रास लीला को बखूबी ढंग से प्रस्तुत किया गया इसके अलावा दशावतार, कोम नृत्य, माओ नृत्य, प्रस्तुत किये।
कलाकारों का स्वागत करते हुए कुलपति विभूति नारायण राय ने सभी को होली की शुभकामनाएं दी और कहा कि आज हम सभी मणिपुरी लोकनृत्य से आनंद से सराबोर होंगे। भाषा विद्यापीठ की छात्रा थोकचम कमला देवी ने कुलपति राय को मणिपुरी शाल प्रदान कर कार्यक्रम की प्रस्तावना में कहा कि मणिपुर भारत के भूगोल में उत्तरपूर्व में स्थित है। यहां की लोककला प्रसिद्ध है। मणिपुरी लोक कला समस्त भारत को जोडने का काम करती है। मणिपुर के सुप्रसिध्द पत्रकार इबुंडो चौबी ने अपने संबोधन के दौरान कहा कि विश्व में पोलो खेल की शुरूआत मणिपुर से ही हुई है। इस संास्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से मणिपुर व विश्वविद्यालय का रिश्ता गहरा हुआ है। कुलसचिव राकेश ने कलाकारों का आभार मानते हुए कहा कि भविष्य में हम यहां पर मणिपुर के कलाकारों के द्वारा नाटक की प्रस्तुति भी करवायेंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रम का संचालन ब. व. कांरत नाट्य परिषद् के प्रभारी डॉ. अनवर अहमद सिद्दीकी ने किया। होली संध्या पर सांस्कृतिक कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शोधार्थी, विद्यार्थी रंग गुलाल से सराबोर होकर खूब थिरके।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो. नदीम हसनैन, पद्मा राय, निषात हसनैन, वेदा राकेश, प्रो. आत्म प्रकाश श्रीवास्तव, डॉ. संतोष भदौरिया सहित शैक्षणिक गैरशैक्षणिक कर्मी, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित थे। मणिपुर से आए कलाकारों में युम्नाम इबुड्डो सिंह, चाकप्रम नरेन्द्र सिंह, एन ओजित कुमार सिंह, ए. नीलचंद्र सिंह, ति ननाओ सिंह, एस शांतिकुमार सिंह, एस. एस. निमिता देवी, बी मेमतोम्बी देवी, बी रंजना देवी, एस.एस. सोनी देवी, के नोंमाइलैमा देवी, जी ओमिता देवी, एस विज्ञानेश्वर शर्मा, एन जीनेन सिंह, एस कृष्णानंद शर्मा, एन. प्रेमानन्द सिंह, एम. हेरोजित सिंह, डब्ल्यू शांता सिंह, ए. खुमनलैमा देवी, एम. इबेतोम्बी देवी का समावेश था।
वि.वि. मे पी.एच.डी. शोधार्थियों की 'शोध-समवाय' गठित
में आधुनिक विमर्शों और आंतरानुशासनिक विषयों का अध्ययन एवं शोध कार्य को बढावा देने हेतु महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में पी.एच.डी. शोधार्थियों के 'शोध-समवाय' का गठन किया गया है।
विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय की अध्यक्षता में पी.एच.डी. शोधार्थियों के विभिन्न समस्याओ के समाधान के उद्देश्य से पी.एच.डी. शोधार्थियों की एक आम बैठक की गई। बैठक के दौरान विश्वविद्यालय के प्रति कुलपति प्रो नदीम हसनैन, संस्कृति विद्यापीठकी अधिष्ठाता प्रो.इलीना सेन, भाषा विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. महेन्द्र कुमार सी. पांडेय, अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रा. आत्म प्रकाश श्रीवास्तव एवं साहित्य विद्यापीठ के विभागाध्यक्ष डॉ. हनुमान प्रसाद शुक्ल उपस्थित थे।
विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो नदीम हसनैन को 'शोध-समवाय' का अध्यक्ष कुलसचिव राकेश को संयोजक तथा पी.एच.डी. के शोधार्थी मिथिलेश कुमार को समन्वयक बनाया गया है। शोध समवाय के अंतर्गत 2009 में होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों के लिए आयोजक समिति भी बनाई गई जिसमें अहिंसा एवं शांति अध्ययन विभाग के कन्हैया त्रिपाठी जनसंचार एवं संप्रेषण विभाग के अमित कुमार विश्वास, स्त्री अध्ययन की ममता कुमारी, साहित्य विद्यापीठ के ज्योतिष पायें, भाषा विद्यापीठ के अमितेश्वर पाण्डेय व अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के जनार्दन मिश्र को सदस्य के रूप में नामित किया गया है। 'शोध-समवाय' वर्तमान में चले रहे अंतरानुशासनिक विषयों, मुद्दो पर शोधार्थियों की समझ व संकल्पना विकसित करने के लिए प्रत्येक माह कार्यशाला आयोजित करेगा ।
'अस्मिता की राजनीति' पर द्विदिवसीय कार्यशाला
शोध समवाय का दूसरा वैचारिक कार्यक्रम
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में हाल ही में गठित शोध समवाय के तत्वावधान में 'अस्मिता की राजनीति' पर विश्वविद्यालय परिसर में 30 और 31 मार्च को द्विदिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इस कार्यशाला में विशेषज्ञ के रूप में सुप्रसिद्द इतिहासकार प्रो सुधीर चंद्रा, सेन्टर फार वीमेन स्टडीज नई दिल्ली की डॉ. वासंती रामन, दलित चिंतक एवं कथाकार कंवल भारती, बैकवर्ड क्लास कमीशन के पूर्व सदस्य डॉ. हरनाम सिंह वर्मा, कुलपति विभूति नारायण राय, प्रति-कुलपति प्रो नदीम हसनैन तथा कुलसचिव राकेश वक्तव्य प्रस्तुत करेंगे। कार्यशाला के दौरान, विभिन्न विद्यापीठ के अधिष्ठाता, शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी उपस्थित रहेंगे। शोध समवाय के समन्वयक मिथिलेश कुमार ने विश्वविद्यालय के सभी शोधार्थियों एवं विद्यार्थियो विमर्श कार्यशाला में सार्थक हस्तक्षेप करने की अपील की है।
भारत में दूरशिक्षा : चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर द्विदिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय वर्धा में भाषा के माध्यम से ज्ञान के नवीनतम अनुशासनों की शिक्षा समाज के हर तबके विशेष तौर पर समाज के हाशिए पर रह रहे शिक्षा से वंचित लोगो तक शिक्षा पहुंचाने के उद्देश्य से दूर शिक्षा केंद्र की स्थापना की गई है। वर्धा स्थित विश्वविद्यालय परिसर में आगामी 27 एवं 28 मार्च को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में दूर शिक्षा विभाग व दूरस्थ शिक्षा परिषद् दिल्ली के संयुक्त तत्वावधान में 'भारत में दूर शिक्षा: चुनौतियां और संभावनाएं' विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया है।
इस संगोष्ठी में देशभर के दूरस्थ शिक्षा से जुड़े विद्वत् वक्ता 'मुक्त विश्वविद्यालय : मिथक और यथार्थ', 'भूमंडलीकरण और दूरशिक्षा', 'दूरशिक्षा और मल्टिमीडिया' नई शिक्षा नीति और दूरशिक्षा की भूमिका' विषय पर गहनता से विचार-विमर्श करेंगे। संगोष्ठी में भोज मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल के कुलपति डॉ. कमलाकर सिंह, दूरशिक्षा परिषद्, नई दिल्ली की निदेशक प्रो. मंजूलिका श्रीवास्तव, इग्नू के प्रो. सत्यकाम, आंधप्रश मुक्त विश्वविद्यालय, हैदराबाद के प्रो. एम. एस. हयात, मगध विश्वविद्यालय (बिहार) के डॉ. कमलानन्द झा, राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय, इलाहाबाद के कुलपति प्रो. नागेश्वर राव, दूरशिक्षा परिषद् के उपनिदेशक डॉ. भारत भूषण आदि प्रमुखता से उपस्थित होकर दूरशिक्षा की चुनौतियां व संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।
दूरशिक्षा के कार्यकारी निदेशक व विश्वविद्यालय के प्रतिकुलपति प्रो. नदीम हसनैन ने कहा कि हाल के व में मुक्त विश्वविद्यालयो मे दूर शिक्षा विकासशील एवं विकसित देशा में अपना मजबूत स्थान बना रही है। ऐसे में विश्ववि का दुरशिक्षा केन्द्र वर्तमान शिक्षा व्यवस्था क लिए विकल्प उपस्थित करने, में मौलिक सोच एवं अनुसंधान, समाज के हर तबक़े-विशेष तौर पर शिक्षा से वंचित तबक़ों के लिए उच्चशिक्षा तक पहुंच आसान बनाने हेतु ज्ञान के नवीनतम अनुशासनों की भाषा के माध्यम से मौलिक प्रस्तुति एवं नवीनतम तकनीकों का प्रयोग करते हुए दूर शिक्षा कार्यक्रमों का माध्यम से प्रचार-प्रसार को सुनिश्चित करेंगे।
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के दूरशिक्षा विभाग के क्षेत्रीय निदेशक/रीडर व संगोष्ठी के आयोजन सचिव डॉ. संतोष भदौरिया ने संगोष्ठी के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शताब्दियों से शिक्षा पर कुछ विशेषाधिकार प्राप्त व्यक्तियों/संस्थाओं का एकाधिकार रहा है। जहां कुछ ही लोग शिक्षा प्राप्त कर सकते थे। जबकि समाज का बहुलांश शिक्षा से वंचित रहा है। आज भी आर्थिक क्षेत्र की भांति शिक्षा के क्षेत्र में सम्पन्न और निर्धन सर्वहारा के बीच गहरी खाई है। दूर शिक्षा, शैक्षिक विकास का महत्वपूर्ण पड़ाव है। दूर शिक्षा के समाज का बड़ा तबका लाभान्वित हुआ है। शिक्षा क्षेत्र में दूर शिक्षा के माध्यम से जो मूक क्रांति प्रतिफलित हुई है उसने विश्व समाज की समझ को परिपक्व तो किया ही है, साथ ही शिक्षा का सशक्त विकल्प भी प्रस्तुत किया है।
नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन केन्द्र होगा अद्वितीय
विवि में पाठ्यक्रम निर्माण कार्यशाला में कुलपति राय का उदघाटकीय वक्तव्य
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में सत्र 2009 से शुरू होने होने वाला नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन पर दो वर्षीय एम. ए. स्तर का पाठ्यक्रम अद्वितीय सिध्द होगा और यहा देशभर से ही नहीं अपितु विदेशों से भी विद्यार्थी इस रोजगाराभिमुख पाठ्यक्रम में दाखिला लेंगे। उक्त उद्बोधन विश्वविद्यालय के कुलपति विभूति नारायण राय ने व्यक्त किये। वे साहित्य विद्यापीठ के अंतर्गत नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन में एम. ए. स्तर के दो वर्षीय पाठ्यक्रम निर्माण हेतु आयोजित कार्यशाला के उद्धाटन के अवसर पर बोल रहे थे।
विश्वविद्यालय के जाजूवाडी स्थित विस्तार कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में सुविख्यात नाट्य निर्देशक तथा विश्वविद्यालय के 'राइटर इन रेजिडेंस' हबीब तनवीर, कुलसचिव राकेश, नेशनल स्कुल आफ ड्रामा के निदेशक प्रो. देवेन्द्र राज अंकुर, अमिताभ श्रीवास्तव, प्रो. सचिन तिवारी, भारतेन्दु नाट्य अकादमी लखनऊ के प्रो. राज विसारिया बतौर विशेषज्ञ के रूप में उपस्थित थे।
अपने संबोधन में कुलपति राय ने कहा कि कुलपति बनने के बाद से ही मेरे मन में यह आशा जगी थी कि फिल्म व नाटक का एक ऐसा केन्द्र स्थापित हो जो वृहतर समाज तक कला एवं संस्कृति को संजोए रखने का काम कर सके। इस केन्द्र को इंडियन डायस्पोरा केन्द्र के साथ जोड़ने पर बल देते हुए कहा कि इस पाठ्यक्रम में विश्वभर में जहां भी की पढ़ाई हो रही है वहां के छात्र को कला की समझ विकसित करने का अवसर मिलेगा। उन्होंने घोषण्ाा की कि यह पाठ्यक्रम आगामी अकादमिक सत्र जुलाई से शुरू होगा।
कुलसचिव राकेश ने कहा कि विश्वविद्यालय में पहले से ही दलित, स्त्री, शांति एवं अहिंसा, बौध्द साहित्य, अनुवाद तथा निर्वचन आदि से संबंधित विभागों में अध्यापन हो रहा है। इसी कड़ी में इस वर्ष से शुरू होने वाले इस नये और रोजगारपरक पाठ्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय अग्रगामी हो रहा है। वर्तमान समय में थिएटर एण्ड कल्चरल मैनेजमेन्ट की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
साहित्य विभाग के अध्यक्ष तथा कार्यशाला के समन्वयक डॉ. हनुमान प्रसाद शुक्ल ने पाठ्यक्रम के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि चार सेमिस्टर का यह पाठ्यक्रम कैरियर के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण होगा तथा इसमें थिएटर और सिनेमा का फ्यूजन होगा। इस अवसर पर विशेषज्ञ विद्वानों ने पाठ्यक्रम से संबंधित विभिन्न पहलुओं की चर्चा करते हुए महत्वपूर्ण सुझाव दिये।
शिक्षा के माध्यम से महिलाओं में चेतना का संचार -वेदा राकेश
विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस का आयोजन
शिक्षा के माध्यम से महिलाओं में चेतना का संचार हुआ है। महिलाओं ने ललित कला सहित प्रशासकीय सेवाओं में अपनी उपस्थिति दर्शाकर सृजनात्मकता का काम किया है। उक्त उद्बोधन सुप्रसिध्द नाट्यकर्मी वेदा राकेश ने व्यक्त किये। वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के स्त्री अध्ययन विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर ''सृजनात्मक नारीवादी अभिव्यक्ति'' विषय पर आयोजित चर्चा में बोल रही थीं। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यकारी कुलसचिव राकेश श्रीवास्तव, दूरशिक्षा के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. संतोष भदौरिया तथा पद्मा राय प्रमुखता से उपस्थित थे।
वेदा राकेश ने साहित्य, कला, संस्कृति में महिलाओं के योगदान की चर्चा करते हुए कहा कि महिलाएं शिक्षा का सहारा लेकर अपनी अभिव्यक्ति के माध्यम से आगे आ रही हैं। उन्होंने कहा कि धर्म और समाज ने महिलाओं को हाशिए पर रखा था। जब से धर्म की राजनीति शुरू हुई थी तब से महिलाएं उपेक्षा का शिकार बनती गई तथा महिलाओं के साज और आवाज़ पर सीमा लगा दी थी परंतु अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता आने से उन्होंने सभी विधाओं में अपनी जगह बना रही हैं। महिलाओं के मूलभूत अधिकारों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर उन्होंने बल दिया।
कार्यकारी कुलसचिव राकेश ने जीवन के संघर्ष में उतरी महिलाओं के साथ विमर्श की तथा वंचितों के साथ खडे रहकर उनकी लड़ाई लड़ने की आवश्यकता जतायी। डॉ. भदौरिया ने कहा कि नारीवादी आंदोलन में सबकी भागीदारी बढ़नी चाहिए। राकेश मिश्र ने कहा कि कोमलता और निष्ठुरता को वास्तविकता के आधार पर समझना होगा। चर्चा में अनुवाद एवं निर्वचन विद्यापीठ के डॉ. अनवर अहमद सिद्दीकी, साहित्य विद्यापीठ के डॉ. उमेश कुमार सिंह, दूरशिक्षा विभाग के व्याख्याता संदीप सपकाले तथा छात्र रणवीर, उमा और अनिल मिश्रा ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन स्त्री अध्ययन विभाग की व्याख्याता सुप्रिया पाठक ने तथा धन्यवाद ज्ञापन इसी विभाग की व्याख्याता अवंतिका शुक्ल ने किया।
विवि नाट्य और सिने प्रेमियों की आवश्यकता पूरी करेगा-पंकज राग
नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन में एम. ए. पाठ्यक्रम निर्माण हेतु कार्यशाला का समापन
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में आगामी जुलाई सत्र से आरंभ होने जा रहा नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन में एम.ए. स्तर का पाठ्यक्रम नाट्य तथा सिने प्रेमियों की आवश्यकताओं को पूरी करेगा। सीबीएसई द्वारा अपने पाठ्यक्रम में स्कूली स्तर पर इसका समावेश करने से इस पाठ्यक्रम की उपयोगिता और बढ़ेगी। उक्त मत फिल्म एण्ड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया (एफटीआईआई), पुणे के निदेशक पंकज राग ने व्यक्त किये। वे विश्वविद्यालय द्वारा साहित्य विद्यापीठ के अंतर्गत नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन में एम. ए. पाठ्यक्रम निर्माण हेतु आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के दूसरे दिन (दि. १५ मार्च) महत्वपूर्ण सुझाव दे रहे थे।
विश्वविद्यालय के जाजूवाडी विस्तार कार्यालय में आयोजित कार्यशाला में कुलपति विभूति नारायण राय, कुलसचिव राकेश, प्रो. सचिन्द्र तिवारी, इलाहाबाद, अतुल तिवारी, मुंबई, नाट्यकर्मी वेदा राकेश, प्रो. आत्म प्रकाश श्रीवास्तव, प्रो. हरिमोहन बुधोलिया, नाट्यकला एवं फिल्म अध्ययन विभाग के प्रभारी तथा कार्यशाला के समन्वयक डॉ. हनुमान प्रसाद शुक्ल, डॉ. उमेश कुमार सिंह, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी उपस्थित थे।
विशेषज्ञ के रूप में कार्यशाला के लिए उपस्थित हुए पंकज राग ने पाठ्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा कि सिनेमेटोग्राफ़ी, संपादन, ध्वनी, निर्देशन, स्क्रीनप्ले, फ़िल्म पत्रकारिता, डाक्यूमेन्ट्री फ़िल्म तैयार करना तथा क्षेत्रीय और विश्व सिनेमा आदि का समावेश इस पाठ्यक्रम में किया जाना चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि इस पाठ्यक्रम के लिए एफटीआईआई विशेष सहयोग करेगा। कार्यशाला के अंतिम दिन फिल्म निर्देशन के मूलभूत पहलू, प्रबंधन ओर प्रचार-प्रसार, डाक्यूमेंट्री और नॉन-फिक्शन फ़िल्म, लोक और पारंपरिक नाटक, भारतीय सिनेमा, क्षेत्रीय सिनेमा आदि पर विस्तार से चर्चा की गई।
।
|