डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन बौध्द-अध्ययन केन्द्र
14 अप्रैल, 2004 में डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर की जयन्ती के दौरान कार्यक्रम के अध्यक्ष व तत्कालीन कुलपति प्रो. जी. गोपीनाथन ने सर्वप्रथम डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के -प्रेम एवं भारतीय संविधान निर्माण में विशेष योगदान तथा भारत में बौध्द धम्म को पुनर्जीवित करने के कार्य को सुदृढ़ आधार प्रदान किया। दलितों तथा आदिवासियों के जीवनयापन एवं संस्कृति के अध्ययन तथा उनके विकास को नई दिशा प्रदान करने की व्यापक दृष्टि से विश्वविद्यालय में 'डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर दलित एवं जनजातीय अधययन केन्द्र' की आधारशिला भी इसी कार्यक्रम के अंतर्गत रखी गई।
जिस प्रकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम विश्वविद्यालय से जुड़ा है, उसी प्रकार इस केन्द्र के नाम के साथ डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन का नाम जुड़ा है तथा बौध्द अध्ययन केन्द्र डॉ. भदन्त आनन्द कौसल्यायन के नाम पर रखा गया है। भदन्तजी के प्रचार-प्रसार में महत्तव एवं योगदान को देखते हुए उनके नाम पर अध्ययन-केन्द्र का होना उच्च शिक्षा के क्षेत्र में इसके अध्ययन, अध्यापन तथा शोधा के सामाजिक व सांस्कृतिक सरोकारों को व्यापक रूप में प्रस्तुत करता है। राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के सचिव तथा प्रधानमंत्री के रूप में भदन्त जी ने भाषा की बड़े उत्साह एवं समर्पित भाव से सेवा की। इस दौरान उन्होंने श्रीलंका, जापान, थाइलैण्ड, ब्रिटेन आदि देशों की यात्राएँ भी की। सेवा के लिए उन्हें विद्यालंकार विश्वविद्यालय( श्रीलंका द्वारा मानद डी.लिट्. की उपाधि से सम्मानित किया गया तथा साहित्य सम्मेलन (प्रयाग) द्वारा 'साहित्य वाचस्पति' की उपाधि प्रदान की गई। नालंदा महाविहार की ओर से पालि और बौध्द धर्म की सेवा के लिए उन्हें विद्यापारिध की उपाधि प्रदान की गई।
इस अध्ययन केन्द्र के अंतर्गत अन्य विश्वविद्यालयों से संयुक्त भूमिका के अंतर्गत केलानिया विश्वविद्यालय (श्रीलंका) द्वारा भी सहयोग लिया जाएगा और बौध्दसाहित्य एवं बौध्ददर्शन पर लघु पाठयक्रमों का संयोजन किया जाएगा। दोनों विश्वविद्यालय अपने विद्यार्थियों व अध्यापकों को सुविधा प्रदान करेंगे। विश्वविद्यालय अपने बौध्द विद्वानों को अध्ययन केन्द्र के अध्यापक तथा शोधार्थी भेजेंगे तथा अध्ययन के लिए विद्यार्थियों को आमंत्रित किया जाएगा। बाह्य-अतिथियों को विश्वविद्यालय द्वारा आवासीय सुविधा प्रदान की जाएगी। इस प्रकार आनेवाली पीढ़ियों के लिए यह अध्ययन केन्द्र अत्यन्त महत्तवपूर्ण शैक्षिणिक मिसाल कायम करता है।
संचालित पाठयक्रमों का विवरण :
1. बौध्द-अध्ययन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
प्रवेश शुल्क : रु. 1200/-
योग्यता : किसी भी विषय में स्नातक।
प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र
प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र (भाषा-प्रौद्योगिकी, अनुवाद प्रौद्योगिकी, सूचना-प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला) विश्वस्तरीय उच्चमानकता के साथ कम्प्यूटर विज्ञान, सूचना-प्रौद्योगिकी एवं इनके अनुप्रयुक्त क्षेत्र में प्रशिक्षण देने तथा गहन शोधकार्य करने हेतु अपनी अत्याधुनिक प्रयोगशाला के द्वारा भाषा-प्रौद्योगिकी, अनुवाद प्रौद्योगिकी और सूचना-प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में शोध एवं विकास की दृष्टि से को अंतरराष्ट्रीय भाषा के रूप में स्थापित करने के लिए समर्पित हैं। इस केन्द्र की प्राथमिकता विश्वविद्यालय में प्रौद्योगिकी के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय विकास से सम्बन्धित शिक्षा के अन्य अनुशासनों को मदद देने तथा ई-कैम्पस एवं ई-कल्चर को बढ़ावा देना भी है। इस केन्द्र में स्नातकोत्तर एवं शोध स्तरीय तथा सर्टिफिकेट एवं डिप्लोमा स्तरीय पाठयक्रम चलाए जाते हैं।
1. 1. मास्टर ऑफ इन्फॉरमेटिक्स एन्ड लैंग्वेज इंजीनियरिंग (एम.आई.एल.ई. )
इस पाठयक्रम के अंतर्गत भाषा से जुड़े सूचना एवं अभियांत्रिकी क्षेत्र का अध्ययन किया जाता है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में भाषा को लेकर नई अवधारणा का विकास करना है। इस पाठयक्रम में भाषा-अभियांत्रिकी एवं सूचना-प्रौद्योगिकी से संबध्द विविध प्रयोगात्मक क्षेत्रों के अध्ययन पर बल दिया जाएगा। 64 क्रेडिट का यह पाठयक्रम चार छमाहियों में पूर्ण होता है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है, जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का होता है।
योग्यता :
(क) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम्प्यूटर विज्ञान या सूचना-प्रौद्योगिकी में न्यूनतम 50 प्रतिशत (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत) अंकों के साथ स्नातक (10+2+3 पाठयक्रम) परीक्षा उत्तीर्ण। व अंग्रेजी भाषा का ज्ञान अनिवार्य।
अथवा
(ख) योग्यता (क) में निर्दिष्ट अनुशासन को छोड़कर अन्य किसी भी अनुशासन में किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से न्यूनतम 50 प्रतिशत (अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत) अंकों के साथ स्नातक (10+2+3 पाठयक्रम) उत्तीर्ण एवं कम्प्यूटर एप्लिकेशन/सूचना-प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा।
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु. 500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु. 250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 1500.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क (वार्षिक) : रु. 2500.00
- चिकित्सा शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण: रु. 110.00
- कुल : रु. 5205.00
1.2. पी-एच.डी. (इन्फॉरमेटिक्स एन्ड लैंग्वेज इंजीनियरिंग)
यह पाठयक्रम सूचना-प्रौद्योगिकी एवं भाषा-अभियांत्रिकी से संबध्द क्षेत्रों में अधुनातन शोध को प्रोत्साहित करने एवं नई अवधारणाओें का विकास करने।
योग्यता : (क) प्रोग्रामिंग भाषा की जानकारी के साथ किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम्प्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स/ भाषा-प्रौद्योगिकी/ अनुवाद प्रौद्योगिकी में एम.ए. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्तीर्ण ।
अथवा
(ख) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से भाषाविज्ञान/अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान में एम.ए. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्ताीर्ण एवं कम्प्यूटर विज्ञान/ सूचना-प्रौद्योगिकी में डिग्री/डिप्लोमा।
अथवा
(ग) किसी भी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कम्प्यूटर विज्ञान/सूचना-प्रौद्योगिकी में एम.टेक./ एम.सी.ए./एम.एस.सी. अथवा एम.आई.एल.ई. न्यूनतम 55 प्रतिशत (अनुसूचित जाति तथा अनुसूचित जनजाति के लिए 50 प्रतिशत) अंकों के साथ उत्तीर्ण ।
शुल्क
- पंजीकरण शुल्क : रु. 300.00 (केवल प्रवेश के समय)
- इन्टरनेट शुल्क : रु. 1500.00 (प्रति वर्ष)
- प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 1500.00 (प्रति वर्ष)
- पुस्तकालय शुल्क : रु. 300.00 (प्रति वर्ष)
- प्रतिभूति राशि : रु. 1000.00 (प्रतिदेय)
- परीक्षा शुल्क : रु. 1000.00 (शोध प्रस्तुति के समय)
- चिकित्सा शुल्क : रु. 50.00 (वार्षिक)
- कुल : रु. 5650.00
सर्टिफिकेट/डिप्लोमा
प्रौद्योगिकी अध्ययन केन्द्र द्वारा प्रौढ़ सतत शिक्षा विस्तार एवं सुदूर क्षेत्र केन्द्र के सहयोग से निम्नलिखित पाठयक्रम चलाए जा रहे हैं।
1.3 सर्टिफिकेट इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन (सी.सी.ए.)
यह एक अंशकालिक पाठयक्रम है, जो 16 क्रेडिट का होता है जिसमें 4-4 क्रेडिट के तीन प्रश्न-पत्र एवं 4 क्रेडिट का परियोजना-कार्य होता है।
योग्यता :
किसी भी अनुशासन में 10+2 उत्तीर्ण।
शुल्क
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.1000.00
- प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 750.00
- परीक्षा शुल्क (प्रथम छमाही) : रु. 250.00
- कुल : रु.2000.00
1.4 डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन (डी.सी.ए.)
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठयक्रम है, जो दो छमाही में पूर्ण होता है। 32 क्रेडिट के इस पाठयक्रम की प्रथम छमाही (सी.सी.ए.) में 16 क्रेडिट एवं द्वितीय छमाही में 16 क्रेडिट होते हैं, जिसमें 4-4 क्रेडिट के दो प्रश्न-पत्र एवं 8 क्रेडिट का एक परियोजना-कार्य होता है।
योग्यता :
डी.सी.ए. के लिए सी.सी.ए. उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
शुल्क
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.2000.00
- प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु. 750.00
- परीक्षा शुल्क (प्रथम छमाही+द्वितीय छमाही): रु. 500.00
- कुल : रु.3250.00
भारतीय एवं विदेशी भाषा प्रगत अध्ययन केन्द्र
यह केन्द्र भारतीय एवं विदेशी भाषाओं एवं पारंपरिक संस्कृति की शिक्षा के माध्यम से राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप भारतीयों तथा विदेशियों को शिक्षा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इस केन्द्र के अंतर्गत निम्नलिखित डिप्लोमा/ओरिएन्टेशन/ग्रीष्मकालीन पाठयक्रम चलाए जा रहे हैं।
1.4 डिप्लोमा इन कम्प्यूटर एप्लिकेशन (डी.सी.ए.)
यह एक वर्षीय अंशकालिक पाठयक्रम है, जो दो छमाही में पूर्ण होता है। 32 क्रेडिट के इस पाठयक्रम की प्रथम छमाही (सी.सी.ए.) में 16 क्रेडिट एवं द्वितीय छमाही में 16 क्रेडिट होते हैं, जिसमें 4-4 क्रेडिट के दो प्रश्न-पत्र एवं 8 क्रेडिट का एक परियोजना-कार्य होता है।
योग्यता :
डी.सी.ए. के लिए सी.सी.ए. उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
शुल्क
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.1000.00
- परीक्षा शुल्क (प्रथम छमाही+द्वितीय छमाही): रु. 500.00
- कुल : रु.1500.00
1. 2 संस्कृत में डिप्लोमा
इस पाठयक्रम का उद्देश्य संस्कृत भाषा व साहित्य की सैद्धान्तिक एवं व्यावहारिक आधारभूत जानकारी देना है। पाठयक्रम सामग्री में प्राथमिक जानकारी से लेकर संभाषण तक को शामिल किया गया है। यह एक वर्षीय डिप्लोमा पाठयक्रम है।
योग्यता :
किसी भी विषय में 10+2 परीक्षा उत्तीर्ण ।
शुल्क
डॉ. बाबा साहेब अम्बेडकर दलित एवं जनजाति अध्ययन केन्द्र
केन्द्र के उद्देश्य :
- दलित एवं जनजाति अध्ययन की अवधारणा
- दलित एवं जनजाति अध्ययन की प्रकृति,क्षेत्र एवं गतिकी की समझ विकसित करना
- दलित एवं जनजाति अध्ययन को प्रासंगिक संदर्भ
- दलित एवं जनजाति अधिकारों की रक्षा हेतु नीति निर्माण
- दलितों एवं जनजातियों के सशक्तिकरण हेतु अम्बेडकर विचारों को समझना
- विभिन्न देशों के वंचित तबकों के बीच तुलनात्मक अध्ययन करना
गतिविधियां :
- एम.ए. एवं स्नातकोत्तर डिप्लोमा पाठयक्रम
- एम.फिल. एवं पी-एच.डी. निर्देशन
- दलित एवं जनजाति सम्बन्धी आंकड़ों का संग्रहण एवं डाटाबेस तैयार करना
- सरकारी संस्थाओं द्वारा जारी आंकड़ों का समाजार्थिक आधार पर विस्तृत अध्ययन करना
- दलित एवं जनजाति, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों पर संगोष्ठी,परिसंवाद आदि आयोजित करना
- अकादमिक सदस्यों एवं विद्यार्थियों द्वारा प्राप्त शोध निष्कर्षों का प्रकाशन
- महत्वपूर्ण विचारकों द्वारा भाषण
- भारत एवं विदेशों में अकादमिक आदान-प्रदान के जरिए युवा शोध-अध्येताओं को प्रोत्साहित करना
- भारत एवं विदेशों में दलितों एवं जनजातियों के सशक्तिकरण हेतु कार्यरत नागरिक समुदाय संस्थाओं से सम्पर्क
- जन प्रतिनिधियों, सरकारी कर्मचारियों एवं मीडिया सदस्यों हेतु उन्मुखीकरण कार्यक्रम
- दलित एवं जनजाति, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों पर एक समृध्द पुस्तकालय की स्थापना
- दलितों एवं जनजातियों के सशक्तिकरण, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों पर विभिन्न समूहो हेतु अल्पकालिक पाठयक्रम निर्माण
- अन्य विश्वविद्यालयों में दलित एवं जनजाति, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों पर पाठयक्रम निर्माण एवं अन्य अकादमिक सहायता
- दलितों एवं जनजातियों के सशक्तिकरण, अम्बेडकर विचारों से जुड़ें विषयों को कार्यरूप प्रदान करने हेतु कार्ययोजना
3.1 एम. ए. दलित एवं जनजाति अध्ययन
में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दलित तथा जनजातीय अध्ययन को विस्तार देने की दृष्टि से एम.ए. दलित एवं जनजाति अध्ययन में दो वर्षीय पाठयक्रम चलाया जा रहा है। यह पाठयक्रम चार छमाहियों में पूरा होता है। यह पाठयक्रम 64 क्रेडिट का है। इसके साथ ही कम्प्यूटर का अध्ययन अनिवार्य है जो प्रत्येक छमाही में 2 क्रेडिट का है। इस पाठयक्रम में कुल 28 सीटें हैं।
योग्यता :
किसी भी अनुशासन में न्यूनतम 50 प्रतिशत अंकों के साथ किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक ;10+2+3 पाठयक्रमध्द परीक्षा उत्ताीर्ण। ;अनुसूचित जाति/जनजाति के लिए 45 प्रतिशत
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु.250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु.200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क ;वार्षिक : रु.200.00
- चिकित्सा शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु.110.00
- कुल : रु.1605.00
महात्मा गांधी फ्यूजी-गुरुजी शांति अध्ययन केन्द्र

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय अधिनियम के अंतर्गत वर्ष 2006 में विश्वविद्यालय के लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्रतिपूर्ति के लिए नियम और परिनियम के आधार पर महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी सेन्टर फॉर पीस स्टडीज की स्थापना की गई। इस केन्द्र को MG-FG Centre for Peace Studies के नाम से विभूषित किया गया हैं।
केन्द्र का उद्देश्य देश और देश के बाहर शिक्षण, शोध को बढ़ावा देना है। विश्वविद्यालय इस केन्द्र के माध्यम से तुलनात्मक धर्म, संस्कृति, तथा शांति के विभिन्न परिप्रेक्ष में अनुसंधान करेंगा। गांधी विचार को ध्यान में रखकर अहिंसा, शांति, संघर्ष-समाधान और अंतरराष्ट्रीय संबंध आदि में भी पाठयक्रम संचालित करेगा। यह केन्द्र विद्यार्थियों और युवाओं के लिए सांस्कृतिक विनिमय (Cross-Cultural-exchange) समवाय बनेगा। संघर्ष-समाधान की पध्दतियाँ विकसित करेगा। मुख्यरूप से गांधीजी और फ्यूजीई गुरूजी के सिध्दान्तों को पाठयक्रम में विकसित करने के अलावा अहिंसा और शांति अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए प्रशिक्षण्ा, संगोष्ठी, परिसंवाद, अंतर्संस्थानिक वादविवाद, व्याख्यान माला, पोस्टर प्रदर्शनी, आलेख प्रतियोगिता का आयोजन करेगा। एम. फिल्. और पीएच्.डी. के माध्यम से यह विभिन्न शोध कार्यक्रमों को भी संपंन्न करने के लिए बहुआयामि विकास का केन्द्र बनेगा।
महात्मा गांधी
विश्वभर में अहिंसा के प्रयोगकर्ता के रूप में महात्मा गांधी का नाम ख्यात है। दूनिया में अमन चैन रहे, इस उद्देश्य से गांधी का जीवन ही दुनिया के लिए संदेश है। जरूरत है उस संदेश को समझने की क्योंकि विकास का मौलिक स्वरूप तभी व्यवस्थित हो सकता है जब अंत:शांति अपने संगत स्वरूप में व्यवस्थित हो। गांधी चिंतन के परिप्रेक्ष में विश्व के तमाम विचाराकों ने यह व्यक्त किया है कि शांति और विकास सिनॉनिम्स (Synonymous) की तरह है। यह स्पष्ट है कि शांति के बिना विकास संभव नहीं है और विकास का आधार सामाजिक शांति है। अत: सामाजिक संरचना में शोषण के अवयव की गवेषणा ही शांति शोध है।
फ्यूजीई गुरूजी (Fuji Guruji)
निकीदात्सू फ्यूजीई गुरूजी (Nichidatsu Fuji Guruji) भारतीय धर्म संस्कृति से प्रभावित हो कर भारत आते है। जापानी बौध्द भिक्षू विश्वशांति के लिए विश्व भ्रमण पर निकलते हैं और अक्टूबर 1933 में महाराष्ट्र के वर्धा में महात्मा गांधी से उनकी मुलाकात होती है। गांधी उनकी जापानी प्रार्थना "Na-Mu-Myo-Ho-Rn-Ge-Kyo" से प्रभावित होते है और फ्यूजीई गुरूजी भी गांधी के विचार, व्यवहार और दर्शन से आपलावित हो कर वर्धा में गांधी के सूत्र संधान करते है। आगे चल कर फ्यूजीई गुरूजी भारत-जापान और संपूर्ण विश्व के लिए गांधी और बुध्द के तत्वों से मानवीय शांति के लिए अहिंसक बुनियाद की परिकल्पना में अपना जीवन समर्पण करते है।
महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी शांति अध्ययन केन्द्र द्वारा संचालित पाठयक्रम
समाज के लिए किया गया कार्य या समाज द्वारा किया गया कार्य समाज-व्यवस्था को व्यवस्थित रखने के लिए ही होता है। सामाजिक-संरचना में जो बदलाव आया है, वहाँ कहीं-न -कहीं टूटन, घूटन और शोषण में समाज विकृत भी हुआ है, अव्यवस्थित भी हुआ है और विकसित भी हुआ है। संरचना के साथ संगत बैठाना ही विकास की गांधीवादी व्यवस्था है। इसकी पूर्ति हेतु केन्द्र द्वारा स्नातकोत्तर समाजकार्य (MSW) का पाठयक्रम प्रारंभ किया गया है।
समाज कार्य में स्नातकोत्तर उपाधि
यह दो-वर्षीय पाठयक्रम है।
योग्यता : समाज कार्य/समाज विज्ञान/मानविकी अध्ययन में किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक ;10+2+3 पाठयक्रम परीक्षा उत्तीर्ण ।
शुल्क
- प्रवेश शुल्क : रु. 150.00
- छमाही शिक्षण शुल्क : रु.500.00
- सुरक्षा शुल्क (प्रत्यर्पणीय) : रु.250.00
- पुस्तकालय/प्रयोगशाला संरक्षण शुल्क : रु.200.00
- पुस्तकालय शुल्क (वार्षिक) : रु. 50.00
- खेलकूद शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- परिचय पत्र शुल्क : रु. 20.00
- सांस्कृतिक कार्यक्रम शुल्क : रु. 25.00
- इंटरनेट शुल्क ;वार्षिक : रु.200.00
- चिकित्सा शुल्क ;वार्षिक : रु. 50.00
- अकादमिक/परियोजना भ्रमण : रु.110.00
- कुल : रु.1605.00
संकाय सदस्य
प्रो. मनोज कुमार
प्रोफेसर/निदेशक
शैक्षणिक योग्यता
एम.ए. (गांधी विचार) एल.एल.बी., पीएच्.डी.
पता :
महात्मा गांधी फ्यूजीई गुरूजी शांति अध्ययन केन्द्र
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय,
पंचटिला हिल्स, वर्धा-442001 (महाराष्ट्र)
दूरभाष :
07152-201575
चलितभाष :
09975323109
ई-मेल :
director.mgfgps@hindivishwa.org