प्रस्तावना
महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के निर्माण के पीछे भारत सरकार की यह सोच थी कि यह विश्वविद्यालय राष्ट्रीय स्तर के साथ-साथ अन्तरराष्ट्रीय फलक पर अपनी महत्ता स्थापित करे। इस प्रकार के विचारों को कार्यरूप में परिणत करने के लिए विश्वविद्यालय में हिंदी के प्रमुख साहित्यकारों की दुर्लभ पाण्डुलिपियाँ, पत्रिकाएँ और पुस्तकों का संकलन कार्य प्रथम कुलपति श्री अशोक वाजपेयी के द्वारा शुरू करवाया गया। उनकी यह कल्पना थी कि हिन्दी से जुड़े जितने भी साहित्यकार हैं, उनकी पाण्डुलिपियों को संरक्षित कर उनके प्रकाशन की योजनाएँ बनें, जिससे वे शोधार्थी जो प्राय: कृतियों की अनुपलब्धता की बात करते हैं, उन्हें शोध का एक नव्य धरातल उपलब्ध हो सके। इन्हीं सब अकादमिक सोच के फलस्वरूप विश्वविद्यालय ने यह महसूस किया कि एक अभिलेखागार विकसित किया जाय और उस अभिलेखागार के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में ज्ञात-अज्ञात कवियों, लेखकों की कृतियों के संकलन से सम्पूर्ण अकादमिक जगत में चिन्तन की एक नयी जिज्ञासा पैदा की जाय।

साहित्य, संगीत एवं चित्रकला के अन्त:सम्बन्धों के संरक्षण के साथ-साथ उनमें चित्रित भाव, व्यंजना एवं राग को अपने इलेक्ट्रानिक यन्त्रों के माध्यम से जनमानस तक पहुंचाया जा सकता है। अनेक पदों के नाट्यरूपान्तर इस बात को व्यक्त करने में पूर्णत: सक्षम है कि मूर्ति-शिल्प के माध्यम से भी पदों का अवतरण किया जा सकता है। इस तरह के उपलब्ध नमूने एकत्र करने की योजना है। यदि किन्हीं कारणवश इस तरह के नमूने उपलब्ध नहीं हो पाए, तो ऐसे कलाकारों के माध्यम से अभिलेखागार को समृध्द करना है, जो उन पदों को नाट्य रूपांतरित करने में सक्षम हैं। साहित्यकारों के दुर्लभ चित्रों के संग्रह से नई पीढ़ी अपने पूर्वज साहित्यकारों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त कर सकेगी । प्राय: यह देखने को मिलता है कि जो रचनाएँ अनेक प्रकाशनों से गुजर चुकी हैं, उनमें कई पाठ भेद मिलते हैं। इस प्रकार की रचनाओं के संग्रह से कृति में व्याप्त पाठ-भेद को हिंदी प्रेमी, हिन्दीसेवी एवं अन्यों तक आसानी से पहुँचाया जा सकता है।
उदघाटन
वर्ष 2005 में जैनेन्द्र जन्मशताब्दी के सुअवसर पर वर्धा में हिन्दी के अनेक मूर्धन्य विद्वानों का आगमन हुआ। साहित्य अकादमी दिल्ली तथा महात्मा गांधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वधान में जैनेन्द्र कुमार की जन्मशताब्दी मनायी गयी और इस अवसर पर हिन्दी के सुप्रसिध्द साहित्यकार श्री मनोहर श्याम जोशी तथा श्री महीप सिंह द्वारा दिनांक 29.9.2005 को, विश्वविद्यालय के जाजूवाडी स्थित विस्तार पटल कार्यालय में (1) पाण्डुलिपि और अभिलेखागार तथा (2) हिन्दी संग्रहालय नामक दो महत्वपूर्ण वीथिकाओं का विधिवत् उदघाटन किया गया।
वर्तमान में अभिलेखागार, संग्रहालय में विभिन्न लेखकों, कवियों एवं साहित्यकारों यथा--निराला, मुक्तिबोध, पंत, निर्मल वर्मा, जैनेन्द्र कुमार, अमृता प्रीतम, मनोहर श्याम जोशी, भीष्म साहनी आदि की पाण्डुलिपियाँ, छायाचित्र एवं पत्र आदि संग्रहित हैं। इनके अतिरिक्त कई पत्रिकाओं के प्रवेशांक एवं दुर्लभ पत्रिकाएँ भी हैं।
उद्देश्य
भविष्य में संग्रहालय को विस्तार देने के लिए इसके भीतर अनुभागों जैसे--अभिलेखागार, पाण्डुलिपि संरक्षण हेतु प्रयोगशाला, डाक्यूमेंटेशन, कैटलॉगिंग, प्रकाशन आदि की स्थापना की योजना है। वर्तमान में संग्रहालय में उपलब्ध पाण्डुलिपि, पत्रिकाओं, पुस्तकों, पत्रों आदि के अलग-अलग रखने के लिए पर्याप्त वीथिकाओं के निर्माण की योजना है, जिससे इन्हें पर्याप्त स्थान मिल सके और उसी आकार में उनका विस्तार किया जा सके। संग्रहालय में भविष्य के लिए उपयोगी वीथिकाएँ बनाने पर विचार किया जा रहा है जो निम्नांकित हैं:-
- (क)हिन्दी के उद्गम से लेकर आधुनिक काल तक के साहित्यकारों की रचनाएँ, चित्र आदि।
- (ख)विश्वविद्यालयों में हिन्दी से सम्बन्धित गतिविधियाँ।
- (ग) केन्द्र तथा राज्य सरकारों में हिन्दी की स्थिति एवं गति
- (घ) विदेशों में हिन्दी शिक्षा की दिशा एवं दशा
- (च) हिन्दीतर प्रान्तों में हिन्दी का स्वरूप।
- (छ)महात्मा गांधी और हिन्दी
- (ज)हिन्दी उर्दू का अन्तर्सम्बन्ध
- (झ)हिन्दी का कम्प्यूटरीकरण (साफ्टवेयर से सम्बन्धित)
- (ट) अप्रवासी भारतीय और हिन्दी का प्रयोग
- (ठ) प्रदर्शनी
- (ड) अभिलेखागार
इसके साथ ही संग्रहालय के भीतर और बाहर हिन्दी भाषा एवं साहित्य की अलग-अलग विधाओं के सुप्रसिध्द साहित्यकारों, कवियों, लेखकों, कलाकारों, चित्रकारों के शिलालेखों का निर्माण करने की योजना है। भविष्य में संग्रहालय को गति प्रदान करने के लिए डिजिटल इलेक्ट्रानिकी का निर्माण तथा संग्रहित सामग्री के संरक्षण हेतु रासायनिक प्रयोगशाला स्थापित करने की योजना है।।
वर्तमान में संग्रहालय में कार्यरत अधिकारी एवं कर्मचारी
- डॉ. श्रीरमण मिश्र : प्रभारी
- श्री शम्भूदत्ता सती : सहायक
Health Care
Since, our own Medical Health Center has not started functioning. The University is hiring their services of one Male Doctor , one female Doctor and Dentist Doctor on part time basis. The University build a Health Care Center for Employees and Students and planning to appoint full time Medical Officer in near future.
Approved Hospitals
The University has approved the following hospitals for their employees and students.
- 1. Kasturba Gandhi Medical College, Sevagram
- 2. Savangi Meghe Medical College. Savangi
खेल-कूद
महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय विभिन्न स्तरों पर विद्यार्थियों और शोधार्थियों के रचनात्मक विकास हेतु एक विकल्प प्रस्तुत करता है। इस दिशा में विद्यार्थियों के शारीरिक विकास के लिए क्रीड़ा विभाग की स्थापना की गई। इस विभाग के माध्यम से विभिन्न खेलों का आयोजन किया जाता रहा है जिसमें दिसम्बर 2007 में विश्वविद्यालय की ओर से खेल प्रभारी श्री अमित राय (व्याख्याता, दूरशिक्षा कार्यक्रम) के नेतृत्व में 28 सदस्यीय टीम ने 23 वें पश्चिम क्षेत्र अंतरविश्वविद्यालयीन युवा महोत्सव ग्वालियर में पहली बार भागीदारी की और प्रशंसनीय कार्य किया।
सितंबर 2008 में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रांगण में एक क्रिकेट प्रतियोगिता संपन्न हुई जिसमें एम.ए. तृतीय सेमेस्टर की टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया।
विश्वविद्यालय में खेल प्रांगण, इंडोर स्टेडियम एवं जिम्नेजियम का प्रस्ताव पास किया जा चुका है जिसके तहत विद्यार्थियों को भविष्य में विभिन्न सुविधाएं प्रदान करने के प्रयास जारी हैं।